कंपनी ने इस तिमाही में कुल ₹6,918.24 करोड़ की आय दर्ज की, जो पिछले वर्ष की ₹6,766.03 करोड़ से अधिक है। इंटरस्ट मार्जिन भी 1.53% की दर से बेहतर हुआ है। इस दौरान कंपनी की कुल परिसंपत्तियां बढ़कर ₹4,41,650 करोड़ तक पहुंच गईं, जो पिछले वर्ष ₹4,24,230 करोड़ थीं।
आईआरएफसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक मनोज़ कुमार दुबे ने मंगलवार को इस प्रदर्शन को “रणनीतिक वित्तीय प्रबंधन और परिचालन दक्षता” का परिणाम बताया। उन्होंने कहा, “हम रेलवे इकोसिस्टम में एक मजबूत वित्तीय स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। न्यूनतम ओवरहेड, उत्कृष्ट रेटिंग प्रोफाइल और विविध पोर्टफोलियो के साथ हमने ऐतिहासिक स्तर तक प्रदर्शन किया है।”
शेयर बाजार में कंपनी का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। उसका बाजार पूंजीकरण अब ₹2,54,423.96 करोड़ के स्तर तक पहुंच चुका है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। कंपनी की क्रेडिट रेटिंग में भी सुधार देखा गया है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है।
इस तिमाही में ई-डेट, ई-ट्रैक्टिव और रेलवे से जुड़े अन्य वित्तीय साधनों के माध्यम से पूंजी जुटाने के प्रयासों में भी तेजी देखी गई है। कंपनी ने ₹7.44 प्रतिशत की दर से उच्च प्रतिफल वाले निवेश साधनों के जरिए अपना राजस्व बढ़ाया है।
गौरतलब है कि हाल ही में सरकार द्वारा आईआरएफसी को ‘नवरत्न’ का दर्जा प्रदान किया गया था, जिससे कंपनी को निवेश और संचालन में अधिक स्वतंत्रता प्राप्त हुई है। इसका सकारात्मक प्रभाव इस तिमाही के प्रदर्शन में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
आईआरएफसी द्वारा जारी आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनी न केवल रेलवे के वित्तपोषण में अपनी भूमिका को और व्यापक बना रही है, बल्कि राष्ट्रीय अवसंरचना विकास में भी एक निर्णायक भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।