नीलधारा गंगा के खतरे के साए में लक्सर और खानपुर क्षेत्र के कई गांव
रुड़की, 22 जून (हि.स.)। 2013 की भयावह बाढ़ के जख्म आज भी लक्सर और खानपुर क्षेत्र के लोगों को दर्द देते हैं। उस वर्ष नीलधारा गंगा ने भयंकर रूप धारण किया था और बालावाली से लेकर उत्तर प्रदेश के रामसहवाला तक तटबंध को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। वर्षों बीत जाने के बावजूद इस तटबंध की मरम्मत नहीं हो सकी है, और अब मौसम विभाग के जारी भारी बारिश के अलर्ट ने ग्रामीणों की चिंता को और बढ़ा दिया है।
गंगा के कहर से ग्रामीणों की फसलें तबाह हो गई थीं, लोग अपने घर छोड़कर छतों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए थे। तब से अब तक कई बार विभागीय अधिकारी तटबंध का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। नीलधारा गंगा का तटबंध आज भी कई किलोमीटर तक टूटा पड़ा है, जो दर्जनों गांवों के लिए प्रतिवर्ष आपदा का खतरा बनता जा रहा है।
मौसम विभाग ने आने वाले सप्ताह में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे बालावाली, रामसहवाला, मालीवाला, अहेड़ा समेत अन्य गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा तो ले रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन दिए जाते हैं, वास्तविक काम नहीं होता।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि तटबंध की मरम्मत को लेकर हर साल योजनाएं बनती हैं, सर्वे किए जाते हैं, लेकिन कार्य शुरू नहीं होता। अब जबकि बरसात शुरू हो चुकी है, तो समय रहते मरम्मत न होने पर हालात गंभीर हो सकते हैं।
लक्सर के उपजिलाधिकारी शौरभ असवाल ने बताया कि तटबंध मरम्मत को लेकर निरीक्षण कराया गया है और रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट मिलते ही कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाएगी। हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने भी कहा कि प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क किया गया है।