पोहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के 15 दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकवादियों के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। ये हमले बुधवार रात लगभग डेढ़ बजे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत किए गए और ये ठिकाने बहावलपुर, मुरीदके, बाघ, कोटली और मुजफ्फराबाद में स्थित थे। यह ठिकाने उन स्थानों में से हैं, जहां से भारत पर आतंकवादी हमलों की साजिश रची जा रही थी। पाकिस्तान के स्थानीय समाचार माध्यमों की रिपोर्ट के अनुसार, बहावलपुर में हुई एयर स्ट्राइक के परिणामस्वरूप करीब 30 लोगों की मौत हुई है।
इस हमले में भारतीय वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद के 4, लश्कर-ए-तैयबा के 3 और हिज्बुल मुजाहिदीन के 2 ठिकानों को लक्षित किया। पाकिस्तान के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी के अनुसार, भारत ने इस ऑपरेशन में कुल 24 मिसाइलें दागीं। भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को पूरी रात मॉनिटर किया।
भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि एयर स्ट्राइक का निशाना केवल आतंकवादी ठिकाने थे और किसी भी सैन्य ठिकाने को लक्षित नहीं किया गया है। न्यूज एंजेंसी एएनआई के अनुसार, यह एक संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसमें भारतीय सेना और वायुसेना ने मिलकर सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया। पहलगाम में किए गए आतंकवादी हमले के संदर्भ में, हमले के लिए जिम्मेदार जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर के ठिकानों को निशाना बनाने का निर्णय लिया गया था।
इस घटना के संदर्भ में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान को संदर्भित किया। ट्रंप ने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि यह स्थिति कई दशकों से चल रही है। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटक मारे गए, जिनमें से एक नेपाल का नागरिक भी था। आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर गोली चलाई थी, जो इस हमले की बर्बरता को दर्शाता है।
इस बीच, एयर स्ट्राइक से संबंधित ताजा जानकारी और तस्वीरों के लिए विभिन्न ब्लॉग्स पर अपडेटस उपलब्ध हैं। यह स्पष्ट है कि भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं और आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखते हुए अपना दृढ़ संकल्प दिखाया है। इस ऑपरेशन ने यह भी संकेत दिया है कि भारत अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के संदर्भ में कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान इस स्थिति का कैसे सामना करता है और क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटना पर कैसे प्रतिक्रिया करता है।