पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है, जिसमें भाखड़ा-ब्यास के पानी को लेकर चल रही खींचतान अब विधानसभा की दीवारों तक पहुंच चुकी है। इस मुद्दे पर पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र आज (5 मई) को सुबह 11 बजे आयोजित किया जाएगा। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य हरियाणा को पानी न देने का प्रस्ताव पास करना है, जिसकी मंजूरी पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया द्वारा दी गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में वह पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं, और उनका कहना है कि हरियाणा ने अपने हिस्से का पानी पहले ही इस्तेमाल कर लिया है।
इस जल विवाद की शुरुआत 28 अप्रैल को भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) की बैठक से हुई थी, जहां पंजाब सरकार ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी नहीं देने की अपनी नीयत स्पष्ट की। इसके बाद 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री मान का एक वीडियो वायरल हुआ, जहां उन्होंने कहा कि हरियाणा अब अतिरिक्त पानी का हकदार नहीं है, और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि पंजाब की सरकार राजनीति कर रही है। इस दौरान हरियाणा की सिंचाई मंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से भी मुलाकात की, और हरियाणा सरकार ने BBMB को पत्र लिखकर पानी देने की अपील की।
वहीं, 30 अप्रैल को BBMB ने हरियाणा को 8500 क्यूसेक पानी देने का निर्णय लिया, लेकिन इससे पहले पंजाब ने BBMB के डायरेक्टर वाटर रेगुलेशन को हटा दिया। इस स्थिति के चलते हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा था कि पंजाब इस मामले में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहा। फिर 1 मई को दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक गर्मागर्मी देखने को मिली, जब पंजाब सरकार ने नंगल डैम पर पुलिस तैनात कर दी और पानी का प्रवाह रोक दिया। यह कदम आम आदमी पार्टी ने भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के एक हिस्से के रूप में उठाया।
2 मई को दोनो राज्यों के बीच एक सर्वदलीय बैठक हुई जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया कि हरियाणा को पानी नहीं दिया जाएगा। इस बैठक में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की आवश्यकता की बात भी कही। हालांकि, बैठक के बाद पंजाब ने BBMB की मीटिंग का बायकॉट कर दिया, जिसके चलते तनाव और बढ़ गया। 3 मई को हरियाणा ने भी अपनी बैठक की, जहां सभी दलों ने एकजुटता दिखाई।
इस विवाद के बीच हरियाणा के उपमुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने हरियाणा का पानी असंवैधानिक तौर पर रोका है और इसे दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार का बदला लेने के प्रयास के रूप में देखा। इस तरह, दोनों राज्यों के बीच पानी के अधिकारों को लेकर चलता हुआ यह विवाद न केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ा रहा है बल्कि स्थानीय लोगों की जीवन भर की मूलभूत आवश्यकताओं पर भी प्रभाव डाल रहा है। इस स्थिति के हल के लिए अब प्रधानमंत्री मोदी की मध्यस्तता की उम्मीद की जा रही है।