पंजाब और हरियाणा सरकार के बीच भाखड़ा नहर के पानी के मुद्दे पर जारी विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार बीबीएमबी की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित की गई, जिसका पंजाब ने बायकॉट कर दिया। इसके बावजूद, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के अधिकारियों ने एक घंटे तक बैठक में चर्चा की। सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के अध्यक्ष मनोज त्रिपाठी पंजाब सरकार के साथ इस मुद्दे पर संपर्क करेंगे, जिससे डैम से पानी छोड़ने और सुरक्षा हटाने जैसे मुद्दों पर सहयोग किया जा सके।
पंजाब के सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका राज्य किसी की हक पर डाका नहीं डाल रहा, बल्कि वे अपनी जल सुरक्षा की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भाखड़ा डेम के निर्माण ने कई गांवों को तबाह किया था और लाखों लोगों को बेघर कर दिया। उनका यह भी कहना था कि पंजाब को केवल 35 प्रतिशत पानी ही मिल रहा है, जबकि अन्य राज्यों को अधिक मात्रा में पानी दिया जा रहा है। गोयल ने स्पष्ट किया कि हरियाणा अपना निर्धारित पानी उपयोग करने के बजाय अधिक पानी का इस्तेमाल कर रहा है।
हरियाणा में इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने सर्वदलीय बैठक आयोजित की, जिसमें विभिन्न दलों ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर लड़ने की योजना बनाई। हरियाणा के वकीलों ने इस विषय में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि सुरक्षा बलों को हटाया जाए और समस्या का समाधान किया जाए। इससे यह भी ज्ञात होता है कि हरियाणा के 9 जिलों में पानी का संकट उत्पन्न हो रहा है और यदि यह स्थिति सुधारती नहीं है, तो दिल्ली और राजस्थान को पानी की आपूर्ति में कटौती की जा सकती है।
इस बारे में पंजाब में कांग्रेस के नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं, जिसे गोयल ने गद्दारी के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा दिए गए बयानों के खिलाफ कांग्रेस के नेताओं को स्पष्ट रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। गोयल ने कहा कि नदियों का पानी किसानों तक पहुंचाने के लिए पंजाब सरकार लगातार प्रयासरत है और यदि इस प्रक्रिया में कोई गलती होती, तो बीबीएमबी उन्हें छोड़ने वाली नहीं होती। सब कुछ रिकॉर्ड में है, और इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है।
इस सन्दर्भ में, अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि पंजाब और हरियाणा के बीच यह विवाद कैसे सुलझेगा और दोनों राज्यों के लिए जल प्रबंधन कैसे सुखदायी बन सकेगा। अप्रैल में मेल-मिलाप और सहयोग पर जोर देने की आवश्यकता है, ताकि दोनों राज्यों के बीच जल संकट को नियंत्रित किया जा सके और इससे प्रभावित नागरिकों को राहत मिल सके।