गुना : पत्रकार देवर्षि को अपना आदर्श बनाकर राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखें : शर्मा

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गुना : पत्रकार देवर्षि को अपना आदर्श बनाकर राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखें : शर्मा

गुना, 15 मई (हि.स.)। वर्तमान समय काफी संघर्षपूर्ण होने के साथ ही चुनौतियों से भी परिपूर्ण है। चुनौतियां पत्रकारों के लिए भी कम नहीं है। देश को तोडऩे वाली शक्तियां सामूहिक रुप से सक्रिय बनी हुई है। ऐेसे में पत्रकार जगत की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। पत्रकारों को चाहिए कि वह देवर्षि नारद जी को अपना आदर्श बनाएं और पत्रकारिता में राष्ट्र हित को सर्वोपरि रखें। यह बात अखिल भारतीय साहित्य परिषद मध्य भारत प्रांत के प्रांतीय महामंत्री एवं ओज कवि आशुतोष शर्मा ने कही। शर्मा गुरुवार को देवर्षि नारद जी जयंती पर आयोजित पत्रकार संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी एक निजी होटल में स्व. नाथूलाल मंत्री जनकल्याण न्यास के तत्वावधान में आयोजित की गई थी। जिसमें जिले भर से बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप क्रांतिवीर तात्याटोप विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. किशन यादव ने कार्यक्रम की सफलता से प्रभावित होकर मंच से घोषणा की, कि विश्वविद्यालय में पत्रकारिता संस्थान की स्थापना की जाएगी और इसका नाम नारद जी के नाम पर रखा जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि व्यक्ति कल्याण के बजाए समाज के कल्याण को प्राथमिकता में रखना होता है। तभी परिवर्तन संभव हो पाता है और यह परिवर्तन पत्रकारिता से ही आना संभव है। उन्होने कहा कि प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है। यह ठीक नहीं है, प्रेस लोकतंत्र का स्तम्भ नहीं, बल्कि उसकी आत्मा है। जब-जब सत्ता निरंकुश होती है। उस पर अंकुश लगाने का काम प्रेस करती है। न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका पर निगरानी करने के लिए प्रेस को तैयार किया गया है। उन्होंने लाला लाजपत राय, गोपाल कृष्ण गोखले, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद जी आदि का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि इन्होने जनजागृति के लिए प्रेस को माध्यम बनाया। वर्तमान के पत्रकारों को इनसे प्रेरणा लेकर समाज में जागरुकता लाने के लिए काम करना चाहिए।

ओज कवि ने देवर्षि नारद जी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस सृष्टि के प्रथम पत्रकार है। समाज और सृष्टि के हित में वह सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे, किन्तु बॉलीवुड ने उनके चरित्र को विद्रुप रुप में प्रस्तुत किया। अफसोस की बात यह है कि बॉलीवुड ने दुष्प्रेरित होकर हमने भी नारद जी को विस्मृत कर दिया, जबकि हमें उन्हे आदर्श के रुप में अपने जीवन में उतारना चाहिए था।

कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रुप में संबोधित करते हुए क्रांतिवीर तात्याटोप विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. किशन यादव ने कहा कि पत्रकारों को समाज कल्याण के मुद्दों को भी प्राथमिकता में रखना चाहिए। नशा और शिक्षा को लेकर जनजागृति लाने का काम पत्रकारों को करना चाहिए। उन्होने कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। अगर उसकी निगरानी होगी तो शासन, प्रशासन निष्पक्ष रुप से काम करेगा।