त्राल में सेना-आतंकी मुठभेड़: घिरे 2-3 आतंकी, ऑपरेशन में पहले ढेर हुए थे 3

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जम्मू-कश्मीर के त्राल इलाके में गुरुवार सुबह부터 सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। सुरक्षाबलों ने आतंकियों को एक क्षेत्र में घेर लिया है, जहां नादिर गांव में 2-3 आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इस सूचना के चलते सुरक्षाबलों ने तलाशी अभियान शुरू किया। इससे पहले, 13 मई को शोपियां जिले के केलर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादी मारे गए थे। इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों ने हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी बरामद किया था, जिससे सुरक्षा स्थिति पर काफी ध्यान दिया जा रहा है।

इस बीच, केंद्र सरकार ने भी एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है जिसमें कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के नूर खान और रहीम यार खान एयरबेस को गंभीर नुकसान पहुँचाया। बताया गया है कि भारतीय डिफेंस सिस्टम ने चीन के आधुनिक डिफेंस सिस्टम को जाम करते हुए सिर्फ 23 मिनट में यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने बताया कि इस ऑपरेशन में पेचोरा, OSA-AK और आकाश मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। यह एक महत्वपूर्ण सूचना है, क्योंकि पाकिस्तान को ये हथियार चीन और तुर्किये द्वारा मुहैया कराए गए थे।

ऑपरेशन सिंदूर में कई खतरनाक मिसाइलों, जैसे पीएल-15 तथा तुर्किये के ड्रोन और लॉन्ग रेंज रॉकेट्स को नष्ट किया गया। इनका मलबा भी रिकवर किया गया और उन्हें पहचाना गया। इस कार्रवाई में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ISRO के प्रमुख वी. नारायणन ने जानकारी दी है कि देश के 10 उपग्रह लगातार दुश्मन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। यह मोर्चा भारत की सुरक्षा परिदृश्य को बेहद मजबूत बनाने में मदद कर रहा है।

वहीं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने तुर्किये की इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपने समझौते को समाप्त कर दिया है। JNU ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर लिखा है कि “हम देश के साथ खड़े हैं”, यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय ने देश की सुरक्षा और एकता को प्राथमिकता दी है।

इसी क्रम में, भारतीय व्यापारियों ने तुर्किये से सेब के आयात का विरोध किया है। व्यापारियों का कहना है कि तुर्किये पाकिस्तान को ड्रोन आपूर्ति कर रहा है, जिसका इस्तेमाल वह भारत पर हमला करने में करता है। इसलिए, अब वे तुर्किये से सेब नहीं खरीदेंगे। गौरतलब है कि भारत तुर्किये से सालाना लगभग 1200 करोड़ रुपए का सामान आयात करता है, जिसमें सेब की महत्वपूर्ण मात्रा शामिल है। ऐसे में, सामान्य से व्यापारिक गतिविधियों में भी तनाव का असर देखने को मिल रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग पर नजर बनाए रखें।