जालंधर: पीम्स अस्पताल में गायनी विभाग के तहत चार बेड की हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) की स्थापना की गई है। यह नई इकाई उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, समय से पूर्व जन्म और गर्भावस्था के दौरान बीपी, शुगर, सांस की समस्या और थायरॉयड जैसी विभिन्न बीमारियों से प्रभावित महिलाओं के लिए बेहतर चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगी। विभाग की प्रमुख, डॉ. शैल कौर ने बताया कि यह नई यूनिट गर्भवती महिलाओं की निगरानी और उन्हें सही उपचार देने में अत्यंत सहायक होगी।
इससे पहले, पीम्स अस्पताल में पहले से ही कम वजन वाले या समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के लिए न्यूनीकृत इंटेन्सिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) की सुविधा उपलब्ध थी। अब, एचडीयू के अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं को और भी उच्च गुणवत्ता वाले स्वास्थ्य सेवा मिल सकेगी। इस यूनिट में चार अत्याधुनिक मॉनिटर्स स्थापित किए गए हैं, जो मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और सभी आवश्यक स्वास्थ्य बिंदुओं को मापेंगे।
पीम्स के कार्यकारी अध्यक्ष, डॉ. कंवलजीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि अस्पताल हमेशा से अपने मरीजों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई एचडीयू से गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सा देखभाल में काफी सुधार होगा।
इस कार्यक्रम में पीम्स के निदेशक डॉ. राजीव अरोड़ा, प्रोफेसर एवं डीन डॉ. एचके चीमा, अस्पताल के निदेशक गुरकीरत सिंह सहित अन्य प्रमुख हस्तियाँ भी उपस्थित थीं। उनके द्वारा एचडीयू के उद्घाटन को एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया, जिससे गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
एचडीयू की स्थापना से गर्भाशय में पल रहे शिशुओं की स्थिति का बेहतर ढंग से ध्यान रखा जा सकेगा, जिससे समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप किया जा सकता है। इसकी बदौलत महिलाएं अपने गर्भावस्था के दौरान अधिक सुरक्षित और स्वस्थ महसूस कर सकेंगी। अस्पताल प्रशासन का यह प्रयास न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों के लिए भी एक बड़ी राहत साबित होगा।
पीम्स की यह नई पहल निश्चित रूप से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करेगी। ये विकास जालंधर में चिकित्सा सेवा के स्तर को और ऊँचा उठाने का काम करेंगे।