आईओसीएल गैस बॉटलिंग प्लांट को सीतापुरा से शिफ्ट करने का प्लान बताए आईओसीएल- हाईकोर्ट
जयपुर, 6 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर सीतापुरा स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट को सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया से दूसरी जगह शिफ्ट करने के संबंध में आईओसीएल से चार सप्ताह में प्लान बताने के लिए कहा है। वहीं मामले में पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन को भी पक्षकार बनाए जाने के लिए कहा है। सीजे एमएम श्रीवास्तव व जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने यह आदेश ओमप्रकाश टांक की जनहित याचिका पर दिए।
सुनवाई के दौरान सीजे ने भांकरोटा के पास हुए एलपीजी टैंकर ब्लास्ट मामले का हवाला देते हुए कहा कि मानवीय जीवन व मानवीय संवेदना किसी प्रतिष्ठान के निजी फायदे से बडा है। आईओसीएल एक सार्वजनिक उपक्रम है, उसे जनहित को देखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। अदालत ने कहा कि जिस जगह पर प्लांट लगाया गया था, उस समय हो सकता है कि इसे नियमानुसार लगाया गया हो। मौजूदा समय में प्लांट के पास रिहायशी कॉलोनियों सहित हॉस्पिटल, कॉलेज व स्कूल बन गए हैं और अब यह प्लांट उनके लिए खतरा हो गया है। खंडपीठ ने आईओसीएल से कहा कि वे चाहें तो प्लांट के लिए जगह चिन्हित कर लें। अदालत अदालत राज्य सरकार व संबंधित एजेंसी को उस जगह के आवंटन के लिए कहेगी। सुनवाई के दौरान एएसजी आरडी रस्तोगी ने पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन को भी पक्षकार बनाने के लिए कहा। जिस पर कोर्ट ने संगठन को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. अभिनव शर्मा ने बताया कि साल 2009 में आईओसीएल के फ्यूल ऑयल स्टोरेज प्लांट में लगी आग में 12 लोगों की मौत हुई थी। राज्य सरकार की जांच कमेटी ने 2011 की रिपोर्ट में माना था कि आईओसीएल के सीतापुरा स्थित घरेलू गैस के बॉटलिंग प्लांट को जगतपुरा व सीतापुरा में आबादी विस्तार को देखते हुए शहर से बाहर भेजना चाहिए। इस प्लांट में जामनगर लूणी गैस पाइप लाइन से एलपीजी उच्च दबाव पर सप्लाई होती है, जो सामने के रीको इंस्टीट्यूशनल एरिया के नीचे से आती है। इसके ऊपर ही महात्मा गांधी अस्पताल, पूर्णिमा कॉलेज, राजस्थान फार्मेसी कौंसिल सहित अनेकों शैक्षणिक संस्थान बन गए हैं। इसलिए बॉटलिंग प्लांट को शहर से बाहर भेजा जाए।
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