**बांसवाड़ा में साइबर ठगी का बड़ा मामला: मास्टरमाइंड फरार, दो गिरफ्तार**
हाल ही में बांसवाड़ा में एक विशाल साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने डिजिटल अरेस्ट और शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों से 12 करोड़ रुपए की ठगी की। यह ठगी बांसवाड़ा के परतापुर में किराना दुकान चलाने वाले अमन कलाल (28) के नेतृत्व में हुई, जो अब फरार है। अमन ने करीब 60 लोगों को अपना शिकार बनाकर उनके खातों में ठगी का पैसा जमा किया। यह राशि यस बैंक के डिप्टी मैनेजर मेगनेश जैन और एक पूर्व बैंककर्मी दिव्यांशु सिंह की मदद से खातों में डाली गई और फिर हवाला के माध्यम से दुबई भेजी गई। इस मामले में पुलिस ने मेगनेश जैन और दिव्यांशु सिंह को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य आरोपी अमन की तलाश जारी है।
कोतवाली थानाधिकारी देवीलाल मीणा के अनुसार, बांसवाड़ा साइबर थाने में डकूका के ग्राहक संदेश शाह और उनके भाई ने शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने यस बैंक खाते को पहले ही बंद करवा दिया था, लेकिन उनके पास एक कॉल आया जिसमें कहा गया कि उनके खाते में झूठा ट्रांजैक्शन हुआ है, जिससे बैंक खाते को फ्रीज किया जा रहा है। इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और 11 ऐसे बैंक खातों का पता लगाया जिनमें करोड़ों का लेन-देन हुआ था। पुलिस को पता चला कि जिन खातों को बंद करवा दिया गया था, वहां पर भी साइबर ठगी का पैसा पहुंच रहा था।
पुलिस द्वारा गहन जांच से पता चला कि मेगनेश जैन ने बिना किसी आपत्ति के इन खातों से पैसे निकालने की प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस ठगी के पीछे संगठित गिरोह का हाथ था जिसमें दिव्यांशु ने जाल बुनने में मदद की। दिव्यांशु ने अपनी पूर्व बैंक की नौकरी का लाभ उठाकर अमन के साथ संबंध स्थापित किए और ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे खातों की जानकारी इकट्ठा की। इसके बाद, अमन ने उन्हें कहा कि वे अपने बंद खातों के चेक और एटीएम कार्ड उसके पास दें ताकि वह उन पर ठगी का पैसा ट्रांसफर कर सके।
आरोपी अमन कलाल परतापुर का रहने वाला है, जो किराना स्टोर चलाने के साथ-साथ एक बड़े साइबर ठग गिरोह का सदस्य भी है। उसने बैंकों के कर्मचारियों के साथ मिलकर बंद खातों का लाभ उठाया और फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से चेक क्लियर करवाए। इस तरीक़े से उसने पैसे निकालकर हवाला के ज़रिये दुबई भेजा। मेगनेश जैन ने भी अपने कमिशन के लालच में इस कार्य को सुगम बनाया। उसकी मदद से गिरोह ने भारी मात्रा में पैसे निकालकर उन्हें अपने ठिकाने पर भेजा।
पुलिस जांच में अभी तक 60 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जो विभिन्न राज्यों से आई हैं। इन शिकायतों में डिजिटल ठगी, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी और अन्य शोषणों से संबंधित हैं। बांसवाड़ा पुलिस अब इस गिरोह के विस्तृत नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी है ताकि अन्य कपटपूर्ण गतिविधियों को रोक सके और ज़्यादा लोगों की थगी गई धनराशि की वापसी सुनिश्चित की जा सके। यह मामला इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि साइबर ठगी देश के विभिन्न हिस्सों में कितनी तेजी से फैल रही है और इसे रोकने के लिए सतर्कता और जांच की आवश्यकता है।