हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारों ने चुप्पी साध रखी है। इस बीच, सलमान खान ने सीजफायर पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें उन्होंने भगवान का शुक्रिया अदा किया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने इसे डिलीट कर दिया। इसके साथ ही शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण जैसे अन्य ए-लिस्टर्स ने भी इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। इससे पहले, पाकिस्तानी कलाकारों ने इस ऑपरेशन पर भारत के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं। फवाद खान और माहिरा खान जैसे सेलेब्स ने ऑपरेशन सिंदूर को कायरतापूर्ण करार दिया। कई भारतीय सेलेब्स ने सैनिकों की प्रशंसा की, लेकिन आतंकवाद और पाकिस्तान का जिक्र करने से कतराते रहे हैं।
इस चुप्पी के कारणों पर चर्चा करते हुए, कई अभिनेता और फिल्म निर्माता बॉलीवुड के सुपरस्टारों की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। खासकर टीवी अभिनेत्री फलक नाज और गीतांजलि मिश्रा ने इस पर नाराजगी जताई है। दोनों ने कहा है कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना जरूरी है। फलक नाज ने कहा, “लोग सोचते हैं कि कुछ न बोलना बेहतर है, लेकिन हमें अपने देश के लिए बोलना चाहिए। पाकिस्तानी कलाकारों ने अपने देश के लिए आवाज उठाई, तो हमारे भारतीय सेलेब्स को भी ऐसा करना चाहिए।”
गीतांजलि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “जब पड़ोसी देश के सेलेब्स भारतीय सेना के बारे में बोलते हैं, तो हम क्यों चुप रहें? क्या हमें अपने सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी नहीं चाहिए?” उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी हस्तियों को अपनी आवाज उठानी चाहिए, खासकर जब उनके देश में हमलों की घटनाएं होती हैं। उन्होंने इस पर भी नाराजगी जताई कि छोटे सितारे भी इस मुद्दे पर मौन रह रहे हैं।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिसमें कैंसिल कल्चर या पाकिस्तान के साथ संबंधों का डर शामिल हो सकता है। हर्षवर्धन राणे ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है और कहा कि अगर मावरा होकैन फिल्म में रहेंगे, तो वे उस फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे। इसी तरह, विवेक शर्मा ने भारतीय सितारों की चुप्पी के बारे में आपत्ति जताते हुए कहा कि जिहादी तत्वों के प्रति यह मौन विचार करने योग्य है।
टिप्पणी करते हुए विवेक रंजन अग्निहोत्री ने कहा कि कलाकारों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन कई व्यावसायिक कारण भी होते हैं जो उन्हें चुप रहने के लिए मजबूर करते हैं। इस तरह, यह चर्चा केवल फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज और उसकी नैतिकता से भी जुड़ी है। यह देखना महत्वपूर्ण है कि भारतीय सितारे कब और किस हद तक अपने विचारों को व्यक्त करने की हिम्मत जुटाते हैं।
इस संदर्भ में, बॉलीवुड के इतिहास में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं, जब सेलेब्स विवादों में घिरे हैं। दीपिका पादुकोण ने जेएनयू मामले में समर्थन दिया था और तब से उनके लिए मार्केटिंग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। समान्यत: देखा गया है कि सेलेब्स को कई बार अपने विचार रखने के बाद भारी backlash का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी कमाई और लोकप्रियता पर असर पड़ता है। ऐसे में यह देखना विषय का है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सितारे क्या आगे चलकर इस स्थिति को बदलने की कोशिश करेंगे या फिर इसी चुप्पी का विकल्प अपनाएंगे।