राजस्थान के निम्बहेड़ा में घटी एक भयानक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। युसूफ, उसकी पत्नी चांदतारा, और उनके चार छोटे बच्चों की नृशंस हत्या से हर कोई स्तब्ध है। ज्ञात हुआ कि युसूफ और चांदतारा के शवों को भीलवाड़ा के मांडल इलाके में फेंका गया था, जबकि बच्चों के शव बेरा चौराहे के पास मिले। इस मामले की जड़ों की जांच करने के लिए पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की और अंततः स्थानीय निवासी शराफत और नीचम कुकड़ेश्वर निवासी राजेश खटीक को हिरासत में ले लिया। पुलिस की सख्ती के कारण दोनों आरोपियों ने अपनी कहानी सुनाई, जिसमें उन्होंने इस भयानक हत्या को स्वीकार कर लिया।
शराफत ने बताया कि उसके पिता और चांदतारा के बीच अवैध संबंध थे, जो परिवार में कई बार विवाद का कारण बने। पिता की मृत्यु के बाद, शराफत ने चांदतारा से नफरत पाल ली थी, लेकिन वह इसे बाहर नहीं आने देता था। कुछ समय बाद, चांदतारा के घर वालों द्वारा उसकी बहन के साथ बदतमीजी करने से उसका गुस्सा और बढ़ गया। इस पर शराफत ने अपने दोस्त राजेश के साथ मिलकर युसूफ और उसके परिवार को समाप्त करने की योजना बनाई। उन्होंने युसूफ के परिवार को एक धार्मिक यात्रा के बहाने निम्बाहेड़ा से बाहर बुलाया।
यात्रा के दौरान, जब परिवार हाईवे पर जा रहा था, तभी उन्होंने चुपके से एक सुनसान स्थान पर गाड़ी रोकी। रात के अंधेरे में, दोनों ने तलवारों से युसूफ और चांदतारा पर ताबड़तोड़ हमला किया। संघर्ष के दौरान, बच्चों की नींद खुल गई और वे खौफ में चिल्लाने लगे। लेकिन शराफत और राजेश ने उन्हें रोका नहीं और बच्चों को युनूस के शवों को फेंकने के बाद बेरा चौराहा की ओर ले गए, जहां उनकी भी हत्या कर दी गई।
परिवार के चार बच्चों की नृशंस हत्या पुलिस के लिए एक चुनौती बनी रही। घटना के सात साल बाद, पुलिस ने सबूतों के आधार पर शराफत और राजेश को पकड़ लिया। इस मामले में 41 गवाह और 153 दस्तावेज़ पेश किए गए। 6 अगस्त 2022 को एडीजे महिला उत्पीड़न ने दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई। जज ने कहा कि इस तरह के अपराधों पर किसी भी प्रकार की दया नहीं की जा सकती।
इस क्राइम फाइल की अगली कड़ी में सुनिए बांग्लादेश से आए डकैतों के द्वारा की गई एक और नृशंस वारदात। यह घटनाएं न केवल राजस्थान में बल्कि पूरे देश में सुरक्षा के प्रति गहरी चिंता उत्पन्न कर रही हैं। इस प्रकार के जघन्य अपराधों पर निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।