अंतागढ़ विकास के लिए प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा, स्वास्थ्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही – अनूप नाग

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अंतागढ़ विकास के लिए प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा, स्वास्थ्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही – अनूप नाग

कांकेर, 15 मई (हि.स.)। जिले के अंतागढ़ के पूर्व विधायक अनूप नाग ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि अंतागढ़ क्षेत्र विकास के लिए प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है । अंतागढ़ क्षेत्र के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय रावघाट क्षेत्र की भौगोलिक दूरी को ध्यान में रखते हुए अंतागढ़ में अपर कलेक्टर की पदस्थापना की गई थी, जिससे क्षेत्र के लोगों को न्यायालयीन कार्यों में सुविधा मिली थी। इससे गरीब ग्रामीणों का समय और आर्थिक बोझ दोनों कम हुए थे।

अनूप नाग ने आरोप लगाते हुए कहा कि खदान शुरू होने से पहले जो वादे किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए। जिसके कारण रावघाट क्षेत्र की जनता बीएसपी से भी नाराज़ है। क्षेत्र के आदिवासी किसानों और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का वादा किया गया था, जो अब केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। अंतागढ़ क्षेत्र प्रदेश के राजनैतिक मानचित्र पर उपेक्षित है। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब सांसद और विधायक का गृह ग्राम है, फिर भी जनता की समस्याओं को नजर अंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने बीएसपी पर क्षेत्र के दोहन का आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर बाहरी ट्रांसपोर्टरों को खनिज परिवहन का काम दिया गया है, जिससे क्षेत्रीय बेरोजगारों में रोष है। कई युवा कर्ज लेकर ट्रक व अन्य वाहन खरीदे, लेकिन वादा-खिलाफी के कारण आर्थिक संकट में फंस गए हैं। क्षेत्रीय जनता को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, जबकि जनप्रतिनिधियाें की इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। रावघाट स्वास्थ्य केंद्र का बंद होना क्या सरकार की विफलता नहीं है? पिछले दिनों सांसद द्वारा रावघाट क्षेत्र में बीएसपी के करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का सत्यापन किया गया था। उन्होंने मांग की कि “इन विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए। यदि कार्य धरातल पर नहीं दिखे, तो सांसद व विधायक ने इस विषय पर सेल प्रबंधन व इस्पात मंत्रालय से क्या कार्रवाई की? यह भी जनता जानना चाहती है। जनता सब देख रही है। यदि जल्द ठोस पहल नहीं उठाया गया, तो क्षेत्र की जनता अपने अधिकारों के लिए आंदोलन के लिए मजबूर होगी ।