जैसलमेर में एक दिल दहला देने वाले सड़क हादसे में चार लोगों की जान चली गई, जिनमें एक वनकर्मी भी शामिल है। यह हादसा तब हुआ, जब ये लोग हिरण के शिकार की सूचना के बाद उस जानवर को बचाने के लिए निकले थे। शुक्रवार रात लगभग 10 बजे, लाठी थाना क्षेत्र में इनकी कैम्पर गाड़ी एक ट्रक से टकरा गई। इस दुर्घटना के कारण गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके चलते सभी शव अंदर ही फंस गए। शवों को निकालने के लिए क्रेन का सहारा लेना पड़ा।
यह जानकारी मिली है कि लाठी के जंगली क्षेत्र में शिकारी आने की सूचना थी। इस आपदा में वन प्रेमी राधेश्याम विश्नोई की भी मृत्यु हो गई। राधेश्याम, श्याम प्रसाद (पुत्र बगदूराम विश्नोई), कवराजसिंह भादरिया और वन विभाग के कर्मचारी सुरेंद्र चौधरी के साथ लाठी क्षेत्र के जंगलों में जा रहे थे। यह हादसा लाठी में गैस एजेंसी के सामने हुआ। जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची, उन्होंने गाड़ी के अगले हिस्से को अलग कर के क्रेन की मदद से शवों को बाहर निकाला। सभी शवों को बाद में पोकरण अस्पताल में पहुंचाया गया।
राधेश्याम विश्नोई (28) ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उनके प्रयासों के कारण उन्होंने एक हजार से अधिक हिरणों को रेस्क्यू कर सुरक्षित किया और उनका इलाज करवाया। इस नेक कार्य के लिए उन्हें ‘सेंचुरी एशिया यंग नेचरिस्ट अवॉर्ड’ सहित कई सम्मान हासिल हुए थे। विश्नोई समाज ने भी उन्हें विशेष सम्मान दिया। उनके काम ने बहुत से लोगों को प्रेरित किया और उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
इस घटना ने जैसलमेर के वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं को गहरा सदमा पहुंचाया है। राधेश्याम जैसे लोग, जिन्होंने प्रकृति और जीवों के प्रति समर्पण का परिचय दिया, उनकी कमी इस प्रकार की दुर्घटनाओं से विशेष रूप से महसूस होती है। वनप्रेमियों द्वारा की गई ऐसी अनमोल सेवाएं समाज के लिए एक उदाहरण बनती हैं और हमें संरक्षण के महत्व को समझाती हैं।
अब स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस मामले की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। साथ ही, राधेश्याम के योगदान की सराहना करते हुए, वन विभाग ने उनके काम को मान्यता देने की बात की है। यह स्थिति हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस प्रकार हम अपने समाज में सुरक्षा और जागरूकता बढ़ा सकते हैं, ताकि ऐसे दुखद हादसे भविष्य में न हों।