पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के घर हुए छापेमारी के विरोध में 15 को सुकमा बंद, 16 अप्रैल को धरना प्रदर्शन
जगदलपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। भाकपा के नेता रामा सोढ़ी ने सोमवार को अपने जारी बयान में कहा कि तेंदूपत्ता घाेटाले में सबसे पहले शिकायत करने वाले पूर्व विधायक मनीष कुंजाम के निवास पर एसीबी और ईओडब्ल्यू ने छापा मारकर उन्हें आरोपित बनाने का षढ़यंत्र कर उन्हें अपमानित करने और उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया है। भाकपा कड़े शब्दों में इसकी निंदा करती है। उन्हाेंने कहा कि मनीष कुंजाम और भाकपा नेताओं ने हमेशा यह प्रयास किया है कि आदिवासियों को तेंदूपत्ता की सही और पूरी कीमत मिले। भाकपा नेता रामा सोढ़ी ने कहा कि मनीष कुंजाम के घर पर ईओडब्ल्यू के छापे के विरोध में 15 अप्रैल को सुकमा बंद का आह्वान किया गया है। वहीं 16 अप्रैल को धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया जाएगा।
गाैरतलब है कि तेंदूपत्ता घोटाले को लेकर जगदलपुर में रविवार काे आयोजित एक पत्रकारवार्ता में सुकमा के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इस तेंदूपत्ता बाेनस राशि 6 कराेड़ 54 लाख 71 हजार 902 रुपये के घोटाले की सबसे पहले मैने ही शिकायत की थी, लेकिन आज उन्हें ही आरोपित बनाने की कोशिश की जा रही है। यही नहीं बस्तर और बैलाडीला की भूमि को निजी कंपनियों जैसे कि मित्तल, अडाणी, जिंदल और ओडिशा की एक अन्य कंपनी को लीज पर दिया जा रहा है। इस लीज के खिलाफ आंदोलन न हो इसलिए मुझ पर एसीबी की कार्रवाई से भयभीत करने और दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है, पर हम डरने वाले नहीं हैं।
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि किसी मामले के शिकायतकर्ता के खिलाफ ही एसीबी और ईओडब्ल्यू की जांच खड़ी कर दी जाए, जबकि तेंदूपत्ता बोनस वितरण मामले में उन्हें एक पाई तक नहीं मिला है। ईओडब्ल्यू की जांच में उनके घर से दो मोबाइल व एक डेली डायरी के अलावा कुछ भी नहीं मिला। उन्होंने दोनों मोबाइल के हैश वैल्यू भी उन्हें नहीं दिया गया, जबकि यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जब भी मोबाइल जब्त किया जाता है, उसका हैश वैल्यू दिया जाना चाहिए, लेकिन ईओडब्ल्यू ने उन्हें हैश वैल्यू नहीं दिया। ऐसे में उनके दोनों मोबाइल से छेड़छाड़ करने की संभावना बढ़ जाती है।
अपना सम्मान बचाने सिविल सोसाइटीज के जरिए आत्मसमर्पण करें नक्सलीः पूर्व विधायक ने कहा कि नक्सली जल-जंगल-जमीन के लिए लड़ाई लड़ते रहे और सरकार की खिलाफत करते रहे हैं। ऐसे में एका एक सरकार के सामने हथियार छोड़ने से उनके सम्मान को ठेस पहुंच सकती है। नक्सलियों को मानव अधिकार संस्थाओं और सिविल सोसाइटिज के लोगों से मिलकर उनके माध्यम से आत्मसमर्पण करना चाहिए, ताकि उनका सम्मान भी बचा रहे और बस्तर में नक्सलवाद का खात्मा होकर शांति की स्थापना हो सके। इस दौरान सुकमा जिपं उपाध्यक्ष महेश कुंजाम, पोदिया मरकाम मौजूद थे।
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