शुभम का शव कश्मीर से कानपुर पहुंचा: मंत्री ने दिया कंधा, अंतिम संस्कार में शामिल होंगे योगी!

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए शुभम द्विवेदी का पार्थिव शरीर कानपुर लाया गया है। उनके अंतिम संस्कार का कार्यक्रम बड़े आयोजनों के साथ किया जा रहा है। शुभम का शव लखनऊ एयरपोर्ट से उनके पैतृक गांव हाथीपुर तक पहुँचाने के लिए विशेष रूप से ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण किया गया था। इस सम्मान के साथ, उनके अंतिम यात्रा में प्रदेश सरकार के कई मंत्री भी शामिल हुए।

मंत्री राकेश सचान और योगेंद्र उपाध्याय ने श्रद्धांजलि देते हुए शुभम के शव को कंधा दिया। आज शुभम का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, जिसके लिए उत्तर प्रदेश Chief Minister योगी आदित्यनाथ और भाजपा राज्याध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी भी सुबह 9:30 बजे कानपुर पहुंचेंगे। यह घटना स्थानीय लोगों में शोक और आक्रोश का कारण बनी है, जिन्होंने शुभम के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।

बुधवार की रात, शुभम का शव लखनऊ विमानतल पर पहुंचा, जहां डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस घड़ी में शुभम के पिता को देख बड़ा दिल दहकता हुआ था, जब वो अपने बेटे के शव से लिपटकर रोने लगे। डिप्टी सीएम ने उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की और शुभम के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री योगी ने भी फोन पर शुभम के पिता से बात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

शुभम द्विवेदी उन 27 पर्यटकों में शामिल थे, जिन्हें मंगलवार को आतंकियों ने निशाना बनाया था। उनकी शादी दो महीने पहले ही हुई थी और वह अपने पत्नी एशान्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कश्मीर की यात्रा पर गए थे। एक भयावह घटना का सामना करते हुए, एशान्या ने परिवार को बताया कि आतंकियों ने पहले उनका नाम पूछने के बाद उनके पति की हत्या की। जब उसने आतंकियों से कहा कि उसे भी गोली मार दें, तब आतंकियों ने कहा कि वे उसे छोड़ देंगे और यह भी कहकर चले गए कि उसे जाकर मोदी और सरकार को सब बताना होगा।

शुभम की बेरहमी से हत्या ने स्थानीय समुदाय में आक्रोश की एक नई लहर उत्पन्न कर दी है। लोग इस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए एक जुट हो रहे हैं। शुभम की वीरता और बलिदान को याद करते हुए, उनके मित्र और परिवार वालो ने कहा कि वे उन्हें हमेशा याद रखेंगे। इस घटना का पल-पल की जानकारी के लिए लोग ब्लॉग का सहारा ले रहे हैं, जिससे सही समय पर अपडेट मिल सके। यह घटना केवल व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है कि हमें आतंकवाद के खिलाफ एक जुट होकर खड़ा होना चाहिए।