लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में हाल ही में हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद शुक्रवार को पुलिस ने पांच छात्रों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए छात्रों में एक हॉस्टलर और चार डे स्कॉलर शामिल हैं। घटनाक्रम के दौरान विश्वविद्यालय कैंपस में पुलिस की गश्त भी जारी थी, जिससे कक्षाएं संचालित होती रही। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार छात्रों में अक्षत पांडेय, आयुष शर्मा, सार्थक, पुष्कर और जतिन का नाम शामिल है। इस बीच, प्रोक्टोरियल बोर्ड ने विश्वविद्यालय के संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बनाए रखी और छात्रों को एकसाथ इकट्ठा होने पर फौरन वहां से हटा दिया।
इस प्रकार का हंगामा LU में बुधवार और गुरुवार को छात्रों के दो गुटों के बीच वर्चस्व को लेकर हुआ, जिसमें कई हॉस्टल के छात्रों और सामान्य छात्रों को गंभीर चोटें आईं। गुरुवार को उपद्रवियों के एक समूह ने बदले की भावना से हॉस्टल के छात्रों पर हमला कर दिया, जिससे चार छात्रों को चोटें आईं। इसके बाद, हॉस्टल के छात्रों ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पहले आईटी चौराहे पर प्रदर्शन किया और फिर बड़ी संख्या में कुलपति आवास का घेराव करने पहुंच गए।
नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर अत्यधिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए उपद्रवी छात्रों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। इसके लिए पुलिस ने आईटी कॉलेज से निशातगंज तक लगे कैमरों के फुटेज की जांच शुरू की और संदिग्ध उपद्रवियों की पहचान के लिए कई स्थानों पर छापे भी मारे। मुख्य कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी ने जानकारी देते हुए कहा कि वह इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए हैं और संलिप्त छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने घटनाक्र की स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को अचानक कक्षाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के छात्रों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुनते हुए उन्हें तुरंत समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने वाणिज्य विभाग, टैगोर पुस्तकालय और कैंटीनों का निरीक्षण भी किया, जहां छात्रों ने अपने अध्ययन के विषयों के बारे में जानकारी साझा की।
बीती शाम, लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र गुटों के बीच भयंकर संघर्ष हुआ, जिसमें छह छात्र घायल हुए। छात्रों ने इस स्थिति के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए आईटी चौराहे पर जाम लगा दिया और बाद में कुलपति के आवास का घेराव किया। कुलपति ने उनकी चिंताओं को सुनकर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद छात्रों ने शांति बनाए रखी। यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय के माहौल में तनाव और असुरक्षा का प्रतीक बना हुआ है, और इसके निवारण के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।