100 से अधिक पुलिसवालों से ठगी! करोड़पति बनाने की योजना के मास्टरमाइंड बस कांस्टेबल?

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**राजस्थान पुलिस में ठगी का नया मामला: खाकी में छिपा ठग**

राजस्थान में एक गंभीर ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक पुलिसकर्मी ने अपने समकक्ष पुलिसकर्मियों के साथ धोखाधड़ी करते हुए 50 करोड़ रुपए की चोरी की। यह मामला खासतौर पर तब उजागर हुआ जब एक पुलिस कांस्टेबल ने जोश-खरोश के साथ एक निवेश योजना प्रस्तुत की, जिसमें उसने दावे किए कि वह कुछ ही महीने में सभी निवेशकों को करोड़पति बना देगा। इसके परिणामस्वरूप, 100 से अधिक पुलिसकर्मी इस धोखाधड़ी के शिकार बने।

पुलिस की इस ठगी का मास्टरमाइंड किसी और नहीं, बल्कि खुद पुलिस का ही साथी कॉन्स्टेबल पवन मीणा है। उसने अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए कई पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाया। पवन ने बताया कि करौली में राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट आ रहा है और यह एक सुनहरा अवसर है जिसमें यदि निवेश किया जाए तो चौंकाने वाली रकम कमाई जा सकती है। इस तरह से उसने पुलिसकर्मियों को अपनी बातों में फंसाकर लाखों रुपए की ठगी की।

डिप्टी कॉन्स्टेबल दीपक वैष्णव ने बताया कि उसने भी ठगी का शिकार होकर पवन मीणा को 1 करोड़ रुपए दिए। यह रकम केवल दीपक की नहीं थी, बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों के पैसे भी इसमें शामिल थे। कई कर्मचारियों ने तो अपने घर-जमीन बेचकर या गहनों पर लोन लेकर पैसे दिए थे। दरअसल, पवन ने दीपक से कहा था कि उसे भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में इन्वेस्टमेंट से चार गुना मुनाफा होगा।

जब पीड़ित दीपक ने इसके खिलाफ शिकायत की, तो उसे कोई सटीक कार्रवाई नहीं मिली। मामले को रजिस्टर करने में भी भारी दिक्कतें आईं। अंततः दीपक ने उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया और वहां से उसे न्याय मिला। पुलिस द्वारा की जा रही जांच में अब तक यह पता चला है कि पवन मीणा के खिलाफ और भी कई शिकायतें दर्ज हैं।

अजमेर में सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र में भी इसी तरह के मामले देखे गए हैं, जहां कई पुलिसकर्मी इस धोखाधड़ी का शिकार हुए थे। इस मामले से पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल उठता है और कई पुलिसकर्मियों ने अपनी पहचान उजागर करते हुए आफिस में बैठने वाले अपने समकक्ष को धोखाधड़ी का आरोपी मान लिया है। पुलिस विभाग ने उक्त मामले में आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है, जिससे जल्द ही उसे न्याय के कटघरे में लाया जा सके।

इस मामले में नए खुलासे होते ही पुलिसकर्मियों के दिमाग में एक बड़ा सवाल है – क्या जो लोग कानून बनाए हैं, वही उसके भीतर से सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं? यह मामला हमारे समाज में गंभीर विचार करने का मुद्दा प्रस्तुत करता है कि हमें अपनी सुरक्षा के साथ-साथ कानून का पालन करने वाले वर्ग के भीतर भी सत्यता और नैतिकता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।