सहारनपुर जिले में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे के निर्माण के दौरान एक गंभीर हादसा पेश आया, जिसमें पांच गर्डर गिर गए। इस दुर्घटना के चलते तीन मजदूर मलबे में दब गए। घटना ने मौके पर अफरा-तफरी मचा दी और गर्डर लॉन्चिंग करने वाले अधिकारी वहां से अचानक फरार हो गए। जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली, स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सभी मजदूरों को मलबे से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। यह दुखद घटना रविवार रात को बड़गांव क्षेत्र के मोरा गांव के पास हुई।
घटना के समय, क्रेन का प्रयोग करके गर्डर को पुल पर लगाया जा रहा था, तभी क्रेन की वायर टूट गई, जिससे गर्डर और मलबा नीचे गिर गया। इस दुर्घटना के परिणामस्वरूप, कार्यरत मजदूरों की जान खतरे में पड़ गई। दिल्ली-देहरादून ग्रीन एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य के मैनेजर अनुज पांडेय और प्रोजेक्ट मैनेजर शिव मोहन उस समय गर्डर की लॉन्चिंग करवा रहे थे, जब यह हादसा घटित हुआ। एक डंपर भी गिरने वाली सामग्री की चपेट में आ गया। जैसे ही घटना की जानकारी मिली, घटनास्थल पर स्थानीय लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई और उन्होंने पुलिस को सूचित किया।
पुलिस और ग्रामीणों की संयुक्त टीम ने लगभग एक घंटे तक मशक्कत के बाद मजदूरों को मलबे से निकालने में सफलता पाई। हालांकि, डंपर अभी भी मलबे में दबा हुआ है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है, जहाँ उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है। किसानों के संगठन ने प्रशासन से घटना की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की मांग की है। जिलाध्यक्ष ठाकुर अजब सिंह ने इस बात पर जोर दिया है कि बिना किसी सुरक्षा उपाय के मजदूरों से इस तरह का कार्य करवाना जानलेवा है।
प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर अनुज पांडेय ने स्पष्ट किया है कि गंगनहर में पानी छोड़ने के वजह से निर्माण कार्य में देर हो गई थी, जिससे यह दुखद घटना घटित हुई। वर्तमान में पुलिस मामले की जांच कर रही है ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सहारनपुर की इस घटना ने निर्माण सुरक्षा के मुद्दे को फिर से चिंगारी दी है और अधिकारियों को सुरक्षा मानकों के पालन पर ध्यान देने का एक और मौका दिया है। इस तरह की घटनाओं की अनदेखी करना न केवल मजदूरों के लिए बल्कि उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए भी हानिकारक है। समाज के प्रत्येक वर्ग को इस संबंध में जागरूक होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।