मोहाली की जिला अदालत ने एक गंभीर देशद्रोही मामले में दो आतंकियों को दोषी ठहराते हुए पांच साल की सजा और जुर्माना लगाया है। यह मामला छह साल पुराना है और इसमें अति संवेदनशील आरोप शामिल हैं, जैसे टेरर फंडिंग और आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता। इन दोषियों में लखबीर सिंह, जो होशियारपुर का रहने वाला है और एक ड्राइवर था, तथा सुरिंदर कौर, जिसे सुखप्रीत कौर के नाम से भी जाना जाता है, शामिल हैं, जो फरीदकोट की निवासी और पेशे से नर्स है। लखबीर सिंह को विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई गई है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधियों (निरोधक) अधिनियम की धारा 10 और 13 शामिल हैं। जबकि सुरिंदर कौर को धारा 19 के तहत सजा दी गई है।
इस मामले में सुरिंदर सिंह उर्फ सुख दियोल को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। नवंबर 2019 में, स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) को जानकारी मिली थी कि लखबीर सिंह दुबई में रह रहा है और परमजीत सिंह पम्मा नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति से संपर्क में है। पम्मा भारत में प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल का मेम्बर है और “रेफरेंडम 2020” का समर्थक माने जा रहा है। यह कहा गया कि लखबीर सिंह पंजाब में आतंकवाद फैलाने की साजिश का एक हिस्सा है।
लखबीर सिंह की गिरफ्तारी अक्टूबर 2019 में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हुई थी, जब वह भारत लौटा था। एसएसओसी ने उसके खिलाफ एक मामला दर्ज किया था, जिसमें कई धाराएं लगाई गई थीं। वहीं, सुरिंदर कौर भी लखबीर सिंह से सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़ी हुई थी और उसे भी उसी दिन गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सुखप्रीत कौर के पास से कुछ संदिग्ध सामग्री, जैसे 10 किताबें, पत्रिकाएं और डायरियां बरामद की थीं, जो उसकी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता को दर्शाती हैं।
लखबीर सिंह का सोशल मीडिया पर एक ग्रुप था जिसमें उसने सिख रेजिमेंट नाम से एक ऐसा मंच तैयार किया था, जहां पाकिस्तान में बैठे सदस्य भी शामिल थे। इस ग्रुप द्वारा वे अपनी रणनीतियां कोड में साझा करते थे। पुलिस ने इन सभी गतिविधियों की गहन जांच की, लेकिन किसी भी आरोपी से हथियार नहीं बरामद होने के कारण सुरिंदर सिंह को बरी कर दिया गया।
निष्कर्षतः, यह मामला न केवल पंजाब में चल रहे आतंकवादी गतिविधियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे आतंकवादियों और उनके सहयोगियों के बीच सोशल मीडिया का उपयोग सूचना आदान-प्रदान के लिए किया जाता है। कोर्ट का यह निर्णय निश्चित रूप से आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे देखते हुए, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे सतर्क रहें और इस तरह के मामलों में त्वरित कार्रवाई करें।