लखनऊ के पॉलिटेक्निक विद्यार्थी का सनलाइट से जगमगाएंगे ऑफिस: 15 हज़ार का ऑसिलोस्कोप सिर्फ 2500 में!

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लखनऊ के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक में हाल ही में ‘योगी सरकार के 8 साल बेमिसाल’ उत्सव के दौरान एक शानदार प्रदर्शनी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने कई अद्वितीय नवाचारों को पेश किया। इस प्रदर्शनी के दौरान, पॉलिटेक्निक के छात्र सतीश यादव ने बताया कि उनकी बनाई उच्च भवन की एक मॉडल को एक डोम संरचना के साथ डिज़ाइन किया गया है। इस डोम संरचना से प्राकृतिक रौशनी का प्रवेश संभव हो सकेगा, जो दिनभर भवन के अंदर एक स्वस्थ वातावरण बनाए रखेगा। सतीश ने यह भी बताया कि इस नवाचारी डिजाइन की मदद से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, क्योंकि इसे प्राकृतिक प्रकाश और क्रॉस वेंटिलेशन की तकनीक से लैस किया गया है।

इस उच्च राइज मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में स्थापित किए गए सोलर पैनल भी इसे किसी अन्य ऊर्जा स्रोत पर निर्भरता से मुक्त करते हैं। छात्रों का कहना है कि ग्रीन एनर्जी का उपयोग इस भवन के प्लान को और भी बेहतर बनाता है। प्रदर्शनी के दौरान, मोहम्मद कादिर ने इस संरचना की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह भवन न केवल ऊर्जा के मामले में दक्ष है, बल्कि इससे वातावरण को भी सकारात्मक प्रभाव मिलता है।

इस प्रदर्शनी में एक अन्य आकर्षक नवाचार के रूप में पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों द्वारा विकसित एक सस्ता ऑसिलोस्कोप भी देखने को मिला है। इस ऑसिलोस्कोप की कीमत बाजार में आमतौर पर 15 हजार रुपये होती है, लेकिन छात्रों ने इसे केवल 2500 रुपये में असेंबल किया है। इसकी मदद से वेव फॉर्म का अध्ययन करना संभव है, जिससे किसी भी प्रकार की अशुद्धियों को दूर किया जा सकता है। इस तरह के नवाचार में छात्रों की रचनात्मकता और तकनीकी प्रतिभा को दर्शाता है।

इसी प्रदर्शनी में गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलिटेक्निक की कृष्ण मिश्रा ने वायरलेस पब्लिक एडरेस सिस्टम का निर्माण किया है। इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसमें माइक्रोफोन के साथ एक इन-बिल्ट स्पीकर भी लगा हुआ है, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत सूचना देने में मदद मिलती है। इस नवाचार को घर में उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग करके तैयार किया गया है, जो साबित करता है कि साधारण संसाधनों से भी उत्कृष्ट समाधान संभव हैं।

इस प्रकार, लखनऊ के पॉलिटेक्निक छात्रों की यह प्रदर्शनी केवल टेक्नोलॉजिकल विकास का एक नमूना नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि युवा प्रतिभाएँ किस तरह अपने नवाचारों के जरिए समाज का कल्याण कर सकती हैं। ये सभी नवाचार न सिर्फ तकनीकी दक्षता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि भविष्य में आवश्यक ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूकता फैलाते हैं। इस प्रकार की पहलों से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारत की तकनीकी तस्वीर और भी उज्ज्वल होगी।