हाथ में गदा और त्रिशूल लिए नागा साधु, साथ में डाक घोड़े और हाथियों का भव्य दृश्य, काशी में महाशिवरात्रि की महाकामना का प्रतीक है। इस विशेष अवसर पर जूना अखाड़े के नागा संन्यासी सबसे पहले बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए प्रस्थान करते हैं। इसके बाद, कुल 7 शैव अखाड़ों के लगभग 10,000 महात्मा एक-एक कर बाबा विश्वनाथ के दर पर पहुंचकर उनकी आराधना करेंगे। यह सिद्धिदायक उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भक्तों के उत्साह और आस्था का भी प्रतीक है।
महाशिवरात्रि की भक्ति का दृश्य वास्तव में अद्भुत है। विश्वनाथ मंदिर के बाहर, भक्तों की लंबी कतारें आधी रात से ही दिखाई देने लगी थीं, जो लगभग 3 किलोमीटर तक फैली हुई थीं। जैसे ही सुबह के 2:15 बजे मंगला आरती आरंभ हुई, बाबा विश्वनाथ को दूल्हा बनाकर सजाया गया। इसके बाद, भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान कुछ श्रद्धालुओं द्वारा हंगामा उत्पन्न हो गया, जब उन्हें प्रवेश में रुकावट का सामना करना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने काफी मेहनत से उन्हें समझाया और शांति बहाल की।
इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा विश्वनाथ 45 घंटे तक लगातार दर्शन देंगे, जो एक विशेष घटना है। यह पहली बार है जब बाबा इतनी लंबी अवधि के लिए अपने भक्तों को दर्शन देंगे। महाकुंभ के आयोजन के साथ महाशिवरात्रि का यह संयोग छह साल बाद देखने को मिला है। इससे पहले 2019 के कुंभ में भी इस प्रकार का ऐतिहासिक क्षण आया था, जब 15 लाख श्रद्धालु काशी पहुंचे थे। पिछले वर्ष 8 मार्च 2024 को भी 11 लाख भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए थे।
महाशिवरात्रि का यह पर्व न केवल भक्तों के लिए उपासना का दिन है, बल्कि यह परंपरा और संस्कृति का भी प्रतीक है। भक्त अपनी आस्था के साथ मंदिर में उपस्थित होते हैं, और यह पर्व हर साल एक नए उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग अपने परिवार के साथ इस पवित्र स्थान पर पहुंचकर दर्शन करते हैं, जो इस त्यौहार की धार्मिक महत्ता को दर्शाता है।
इस महापर्व के लिए विशेष पत्रकारिता गतिविधियां भी की जा रही हैं। पाठक महाशिवरात्रि से जुड़ी प्रमुख तस्वीरें और अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग में जुड़े रह सकते हैं ताकि उन्हें इस धार्मिक उत्सव के हर क्षण का अनुभव मिल सके। काशी में बन रहे इस अद्भुत माहौल का हिस्सा बनना हर भक्त की चाहत होती है, और इस बार विशेष रूप से बाबा विश्वनाथ का इस महापर्व पर विस्तारित दर्शन निश्चित रूप से हर भक्त के लिए विशेष अनुभव होगा।