आयुर्वेदिक औषधियों की सुरक्षा आवश्यक: प्रो. प्रजापति
-आयुर्वेद विवि में फार्माकोविजिलेंस की आवश्यकता पर कार्यशाला का आयोजन
जोधपुर, 12 फरवरी (हि.स.)। डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद के सभागार में महाराव शेखाजी क्षेत्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर द्वारा पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवसायियों में औषधि निगरानी (फ़ार्माकोविजिलेंस) के प्रति ज्ञान, दृष्टिकोण एवं व्यवहार- एक बहु-केंद्रित अध्ययन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि आयुर्वेदिक औषधियों की प्रभावकारिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए औषधि निगरानी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्तमान समय में आयुर्वेदिक औषधियों का व्यापक उपयोग हो रहा है, लेकिन उनके संभावित दुष्प्रभावों और औषधीय अंत:क्रियाओं (ड्रग इंटरेक्शन) पर समुचित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि आयुर्वेद में औषधीय मानकों का पालन करते हुए गुणवत्ता नियंत्रण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध कार्य करना आज के समय की मांग है। महाराव शेखाजी क्षेत्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर के सहायक निदेशक डॉ. बीआर. मीणा ने औषधि निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यशाला में विशेषज्ञ वक्ताओं ने औषधि निगरानी से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर व्याख्यान दिए। प्रथम सत्र में डॉ. मोनिका कुमारी ने औषधि निगरानी की वैज्ञानिक प्रक्रिया और आयुर्वेदिक औषधियों में इसके अनुप्रयोग पर प्रकाश डाला। डॉ. किशोर गवली ने औषधियों के प्रतिकूल प्रभावों की पहचान और रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया
कार्यशाला में न केवल व्याख्यान हुए, बल्कि प्रतिभागियों को औषधि निगरानी के तहत रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। कार्यशाला में पूर्व कुलसचिव एवं विभागाध्यक्ष रस शास्त्र विभाग प्रो. गोविंद सहाय शुक्ला, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद के प्राचार्य प्रो. महेंद्र कुमार शर्मा, पीजी उप प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह, यूजी उप प्राचार्य डॉ राजाराम अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं स्नातकोत्तर अध्येता उपस्थित रहे।