सुत्तूर मठ के प्रमुख और मैसूर, कर्नाटक से आये उनके अनुयायियों ने किया स्नान 

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सुत्तूर मठ के प्रमुख और मैसूर, कर्नाटक से आये उनके अनुयायियों ने किया स्नान 

– सभी को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प भारत दर्शनम् के कराये गए दर्शन

महाकुम्भ नगर, 03 फ़रवरी (हि.स.)। परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में सुत्तूर मठ के प्रमुख सुत्तूर स्वामी ने मैसूर, कर्नाटक के अनुयायियों के साथ महाकुम्भ में संगम स्नान किया। इस अवसर पर उन्होंने परमार्थ निकेतन के शिविर में स्वामी चिदानन्द सरस्वती और भगवती सरस्वती से भेंटवार्ता की। सभी को परमार्थ त्रिवेणी पुष्प ’भारत दर्शनम्’ का दर्शन कराया गया।

इस अवसर पर सुत्तूर स्वामी ने कहा कि महाकुम्भ, भारत की अद्भुत सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर है। यह भारतीय समाज की एकता और अखंडता का प्रतीक है। महाकुम्भ के इस दिव्य आयोजन में संतों और श्रद्धालुओं का अद्भुत संगम है। इस दिव्य धरती पर, लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था और भक्ति को महसूस करने आते हैं।

उन्होंने कहा कि परमार्थ त्रिवेणी पुष्प में स्वामी जी ने उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम की संस्कृतियों का अद्भुत समन्वय किया हैं। एक ही स्थान पर आदिगुरू शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों धामों को देखकर मैं गदगद हो गया।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने बसंत पंचमी ‘अमृत स्नान’ की हार्दिक शुभकामनायें देते हुये कहा कि महाकुम्भ की दिव्य धरती पर संत व बसंत का अद्भुत संगम हुआ है, यह संगम सभी श्रद्धालुओं के जीवन में नव उल्लास व उमंग का संचार करेगा।

उन्होंने कहा कि संगम स्नान के लिए आए श्रद्धालु पूरी तरह से सुरक्षित रूप से स्नान करें और स्वयं का ध्यान रखें, भीड़-भाड़ से बचें। अपने प्रियजनों के साथ घर वापस लौटते समय भी सुरक्षा का ध्यान रखें ताकि सुरक्षित घर लौट सके।

उन्होंने कहा कि हम सभी का उद्देश्य यही होना चाहिए कि इस महाकुम्भ के अनुभव से हमारी आस्था और भक्ति और भी मजबूत हो, और हम सभी मिलकर भारतीय संस्कृति, समाज और धर्म को संरक्षित करने में योगदान दें।

स्वामी भगवती सरस्वती ने कहा कि हम सब मिलकर भारतीय संस्कृति की महानता को बनाए रखें और हर दिन अपने जीवन में धर्म और आस्था को साकार करें और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। भारतीय संस्कृति अपने आप में एक अमूल्य धरोहर है, जो हमें न केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी जोड़ती है।

इस अवसर पर जगद्गुरु श्री देशिकुंदरा महास्वामी , सुत्तूर मठ, मदारामाटी (आलमट्टी स्वामीजी), शान्तमालकर्जुन स्वामी , शरथचंद्र स्वामी , शिवलिंगस्वामी, श्री श्रीकांत स्वामी , बसवलींगस्वामी , करवीर स्वामी , चंद्रशेखर स्वामी , जयराजेन्द्र स्वामी , मुलिदुर्य स्वामी , शिवप्रसाद स्वामी , भरत स्वामी उपस्थित रहे।