मिस इंडिया नूतन की 34वीं पुण्यतिथि: अफेयर की अफवाहों पर संजीव कुमार को जड़ा थप्पड़!

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21 फरवरी, 1991 की यह तारीख हिंदी सिनेमा की एक महान अदाकारा, नूतन बहल, के निधन का दिन है। उनके अभिनय का जादू ऐसा था कि दर्शक उनकी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करते थे। उनकी मुस्कान और सरलता दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना चुका था। नूतन को याद करते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने भारतीय सिनेमा में अपने नेचुरल एक्टिंग के माध्यम से एक नई परंपरा की शुरुआत की। 34 वर्ष पहले इस दुनिया को अलविदा कहने वाली नूतन को एक अद्भुत करियर और एक संघर्षशील जीवन जीने के लिए जाना जाता है।

नूतन का करियर 1945 में फिल्म ‘नलदमयंती’ से बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू हुआ। जब उन्हें फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में अनारकली का रोल ऑफर हुआ, तो उन्होंने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह खुद को सुंदर नहीं मानती थीं। बाद में, मिस इंडिया का खिताब जीतकर, उन्होंने अपने आत्मविश्वास को बढ़ाया। नूतन, उस समय की पहली अभिनेत्री बनीं जिन्होंने वुमन सेंट्रिक रोल वाली फिल्मों को अपनाया, और इस तरह उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में न केवल अपने लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त किया।

उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘सीमा’, ‘बंदिनी’ और ‘सुजाता’ शामिल हैं। ‘बंदिनी’ में निभाए उनके युवा कैदी के किरदार ने दर्शकों को खासा प्रभावित किया। शादी के बाद नूतन ने अपने करियर को लेकर संकोच किया, लेकिन बाद में बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ ने उन्हें एक नई पहचान दिलाई। इस फिल्म में उनके अभिनय को बहुत सराहा गया और उन्हें इसके लिए फिर से फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। उन्होंने अपने बाद की फिल्मों में भी दमदार भूमिकाएँ निभाई, जो आज भी लोगों को याद हैं।

नूतन का जीवन संघर्षों से भरा था। वह लंबे समय तक बीमार रहीं और अंततः 1990 में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। अपनी बीमारी के बावजूद, उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी अंतिम दिनों की स्थिति काफी खराब हो गई थी, लेकिन उनके साहस और प्रतिरोध ने उन्हें एक अद्वितीय उदाहरण बना दिया। उनकी मृत्यु के बाद, उनकी मां शोभना समर्थ ने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि नूतन अब इस दुनिया में नहीं हैं।

आज भी, नूतन का नाम उन अभिनेत्री के साथ लिया जाता है जिन्होंने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी। उनकी बेटी प्रनूतन ने कहा कि उन्होंने अपनी दादी से कभी मुलाकात नहीं की, लेकिन उनके कार्य और फिल्मों ने उन्हें एक अभिनेता बनने के लिए प्रेरित किया। नूतन का नाम आज भी उन कलाकारों में शामिल है, जिनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी यादें, उनके काम और उनके संघर्ष हमेशा हमारे दिलों में एक खास स्थान बनाए रखेंगी।