पंजाब के मानसा जिले के अकलिया गांव में एक युवक की नशीली दवाओं की ओवरडोज से हुई मौत के बाद पैदा हुआ विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। इस घटना के संदर्भ में प्रदर्शन करने वाले 40 लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है, जबकि 35 अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई हुई है। यह मामला दो महीने पहले की एक दुखद घटना का परिणाम है, जब एक युवक की जान नशे के चलते चली गई थी।
जैसे ही यह घटना सामने आई, गांव के लोगों ने मृतक के शव को बरनाला-मानसा रोड पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस प्रदर्शन का उद्देश्य प्रशासन और सरकार का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचना था, जिससे न केवल मृतक के परिवार को न्याय मिले, बल्कि नशे के बढ़ते मामलों पर भी ठोस कदम उठाए जाएं। सरकार ने मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की, लेकिन इसके बाद भी जोगा पुलिस थाने ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जिससे गांव में और भी असंतोष बढ़ गया।
इस असंतोष ने किसान जत्थेबंदियों को मजबूर किया कि वे एकजुट होकर विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करें। डकौंदा, धनेर, उगराहा और अन्य गांवों के निवासियों ने एसएसपी कार्यालय के बाहर एक बड़े प्रदर्शन का आयोजन किया। इस दौरान किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि अगर मामले को जल्द रद्द नहीं किया गया, तो वे पुलिस के खिलाफ कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। महेंद्र सिंह, पाल सिंह, राज सिंह, लखबीर सिंह और परविंदर सिंह ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सरकार से मामले का त्वरित समाधान निकालने की अपील की।
डीएसपी बूटा सिंह गिल ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें आश्वासन दिया कि तीन मार्च को एक बैठक आयोजित की जाएगी जहां मामले की गंभीरता पर चर्चा की जाएगी और समाधान तलाशा जाएगा। इस आश्वासन के बाद, प्रदर्शनकारियों ने अपनी धरना समाप्त करने का फैसला लिया। हालांकि, यह स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और गांव के लोग अपनी चिंताओं को लेकर सतर्क हैं।
इस पूरे मामले ने यह सवाल खड़ा किया है कि पंजाब में नशे की समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है और इससे निपटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। करें तो इस मुद्दे पर एक गहरी चर्चा की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों से बचा जा सके और युवाओं को नशे की लत से मुक्त किया जा सके।