कपूरथला का युवक अमेरिका से डिपोर्ट: परिवार कर्ज में डूबा, तनाव बढ़ा!

Share

पंजाब के कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी से एक युवक, गुरप्रीत सिंह, अमेरिका से डिपोर्ट होकर भारत लौट आया है। गुरप्रीत, जो गांव तरफ बहबल बहादुर का निवासी है, देर रात लगभग दो से तीन बजे अपने घर पहुंचा। परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह इस समय बहुत तनाव में हैं और किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। बुधवार दोपहर, अमेरिकी मिलिट्री के सी-17 विमान ने भारतीय प्रवासियों को अमृतसर के श्री गुरु रामदास अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतारा। यह विमान 4 फरवरी को सुबह तीन बजे अमेरिका से उड़ान भरकर भारत आया। यह पहला अवसर है जब अवैध प्रवासियों को वापस लाने के लिए अमेरिका की सेना के विमान का सहारा लिया गया है।

गुरप्रीत के पिता, तरसेम सिंह, जो एक दिहाड़ी श्रमिक हैं, ने बताया कि उन्होंने अपने घर को गिरवी रखकर और रिश्तेदारों से उधार लेकर 45 लाख रुपये जुटाए थे। उन्होंने महज छह महीने पहले ही अपने बेटे को विदेश भेजा था। परिवार के सदस्यों का कहना है कि गुरप्रीत 22 दिन पहले ही अमेरिका के बेस कैंप में पहुंचा था। बेटे के डिपोर्ट होने की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तरसेम सिंह ने बताया कि इस समय उनकी आंखों में आंसू हैं और वे बेहद निराश हैं।

दुखित पिता ने कहा कि उनके लिए अब केंद्र और पंजाब सरकार ही एकमात्र आशा का स्रोत हैं। वे चाहते हैं कि सरकार उनके बेटे को पंजाब में काम दिलाने में मदद करे ताकि वह अपने ऊपर चढ़े भारी कर्ज को चुका सके। उन्होंने सरकार से अपील की है कि स्थिति को समझते हुए वे उनके बेटे को कोई स्थायी रोजगार प्रदान करें। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि गुरप्रीत को भी मानसिक शांति मिलेगी।

थाना सुल्तानपुर लोधी के SHO, हरगुरदेव सिंह ने जानकारी दी कि डिपोर्ट हुए गुरप्रीत सिंह को सुरक्षित रूप से उसके घर पहुंचा दिया गया है। इस घटना ने पूरे गांव में हलचल मचा दी है और लोग गुरप्रीत के परिवार के प्रति सहानुभूति जता रहे हैं। स्थानीय समुदाय ने इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि यह प्रवासियों की सुरक्षा और उनके भविष्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

गुरप्रीत के साथ हुई इस घटना ने न केवल उसके परिवार की धुरी को प्रभावित किया है, बल्कि यह अन्य प्रवासियों के लिए भी एक चेतावनी है। जितना महत्वपूर्ण विदेश जाकर बेहतर जीवन की तलाश करना है, उतनी ही महत्वपूर्ण यह समझना भी है कि वहाँ की परिस्थितियाँ हमेशा अनुकूल नहीं होतीं। इस घटना ने यह दर्शाया है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान किसी भी संकट का सामना करना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार गुरप्रीत और उसके परिवार को किस तरह की सहायता प्रदान करती है।