हाल ही में पंजाब के जगराओं के गांव सदरपुरा में एक बेहद दुखद और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति ने अपने दोस्त के भतीजे से अपनी बेटी की शादी करने से इनकार कर दिया। इस पर नाराज होकर दूसरे पक्ष के लोगों ने उसके घर में घुसकर उसे बुरी तरह से घायल कर दिया। घायल व्यक्ति की पहचान रहनदीन के रूप में हुई है, जो गलती से गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में अपनी जान गंवा बैठा। इस घटना के बाद थाना सिधवां बेट की पुलिस ने एक ही परिवार के छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें शाहदीन, सुरमूदीन, राझा, माम हुसेन, बाघी और एक अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित शोकत अली ने बताया कि उनकी परिवार की पृष्ठभूमि गुर्जर समुदाय से संबंधित है। रहनदीन के पिता की शाहदीन के साथ मित्रता थी, और इसी के चलते उनकी बहन का रिश्ता शाहदीन के भतीजे के साथ बचपन में तय कर दिया गया था। लेकिन कुछ समय बाद दोनों परिवारों के बीच संबंधों में खटास आ गई, जिससे रहनदीन के पिता ने अपनी बेटी की शादी करने से मना कर दिया। इस फैसले से आक्रोशित आरोपी परिवार ने शोकत अली के परिवार को धमकी देना शुरू कर दिया कि वे उसकी बहन को अगवा कर लेंगे।
विवाद बढ़ने पर, गुर्जर समुदाय की पंचायत ने इस मुद्दे पर निर्णय लिया कि यदि लड़की का पिता शादी नहीं चाहता, तो इसे बलात् नहीं किया जा सकता। फिर एक रात, जब रहनदीन भोजन करके अपने कमरे में सो रहे थे, तब आरोपी तेजधार हथियारों से उनका घर में घुसकर हमला कर दिया। इस हमले में रहनदीन गंभीर रूप से जख्मी हो गए, और उन्हें पहले सिधवां बेट के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें लुधियाना रेफर कर दिया, जहां उनकी दुर्भाग्यवश मौत हो गई।
जब पुलिस को इस घटना की सूचना मिली, तो उन्होंने फौरन मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमॉर्टम के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया। पीड़ित शोकत अली ने यह भी बताया कि उनके पिता के शरीर पर 14 गंभीर चोटों के निशान थे, जिनमें से 11 चोटें इतनी खतरनाक थीं कि बचना बहुत मुश्किल था। पुलिस ने मामले में आरोपी को पकड़ने के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। एसआई सुरजीत सिंह ने जानकारी दी कि आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
यह मामला समाज में रिश्तों और विवाह के मुद्दों से जुड़े जटिल पहलुओं को उजागर करता है। यह घटनाएं न केवल परिवारों को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी बनाती हैं। ऐसे मामलों में सही ढंग से और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसे हिंसक कृत्यों से बचा जा सके।