जयपुर में महाशिवरात्रि का पर्व बुधवार को धूमधाम से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ शिवालयों में देखने को मिली। प्राचीन ताड़केश्वर महादेव मंदिर, रोजगारेश्वर महादेव मंदिर और झारखंड महादेव मंदिर के दर्शन हेतु भक्तों का तांता सुबह से ही लगा रहा। विशेष रूप से ताड़केश्वर महादेव मंदिर में, श्रद्धालुओं ने तड़के 4 बजे से दर्शन के लिए आना शुरू कर दिया था। भक्त जनों ने भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित करते हुए गंगाजल से जलाभिषेक किया और उन्हें फल-फूल अर्पित किए।
पूजा अर्चना के दौरान, भोलेनाथ को ऋतु पुष्प, धतूरा, गाजर, मोगरी, बेर, शमी पत्र और बेलपत्र चढ़ाए गए। इस श्रद्धालु भीड़ को ध्यान में रखते हुए, सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया था। बड़ी चौपड़ से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग की गई थी और सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर में सौ से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।
ताड़केश्वर महादेव मंदिर की ऐतिहासिकता के बारे में बताते हुए मंदिर के महंत परिवार के पंडित मनीष व्यास ने कहा कि यह मंदिर जयपुर के स्थापना काल से भी पुराना है। यहाँ उपस्थित स्वयंभू शिवलिंग की प्रतिष्ठा बहुत प्राचीन है। वर्तमान में, व्यास परिवार की आठवीं पीढ़ी मंदिर की सेवा का दायित्व निभा रही है। पुरानी कहानियों के अनुसार, पहले इस स्थान पर ताड़ के पेड़ों का एक बड़ा जंगल हुआ करता था। एक गाय नियमित रूप से श्मशान भूमि पर एक विशेष स्थान पर दूध छोड़ती थी, जो विशेष रूप से लोकप्रिय था।
एक गहरा महत्व इस कहानी में छिपा है, जब खुदाई के दौरान उस स्थान से एक शिवलिंग प्राप्त हुआ। इसके बाद, महाराजा सवाई जयसिंह ने इस अद्भुत खोज के आधार पर मंदिर का निर्माण कराने का निर्णय लिया और आमेर के व्यास परिवार को पूजा का जिम्मा सौंपा। इस प्रकार, ताड़केश्वर महादेव मंदिर की स्थापना ने न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा दिया, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए रखा है।
महाशिवरात्रि के इस पावन पर्व पर, श्रद्धालुओं ने न केवल शिवलिंग की पूजा की, बल्कि अपनी आस्थाओं का पुनर्नवनीकरण भी किया। हर वर्ग के भक्तों ने मंदिर में विभिन्न प्रकार की पूजा अर्चना की, जिससे इस पर्व की महत्ता और भी बढ़ गई। भगवान शिव के प्रति भक्ति की यह लहर आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, जो हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर जीवन्त हो उठती है।