सुप्रीम कोर्ट कमेटी की बैठक रद्द, SKM ने भागीदारी से किया इनकार!

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित उच्च स्तरीय समिति की बैठक किसानों के संगठनों द्वारा हिस्सा न लेने के चलते स्थगित कर दी गई है। यह बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित थी, लेकिन अब यह निर्णय लिया गया है कि संयुक्त किसान मोर्चा (उगराहां) को 4 जनवरी को वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा आज लुधियाना में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन कर रहा है। इसी बीच, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन 39वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे 4 जनवरी को खनौरी बॉर्डर पर पहुंचें।

जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अपने संदेश में कहा कि देश के सभी लोग जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की लड़ाई का हिस्सा बनना चाहते हैं, उन्हें चार जनवरी को खनौरी बॉर्डर आने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी को वहां देखना चाहता हूं, आपका दर्शन पाने की इच्छा है।” डल्लेवाल की स्वास्थ्य स्थिति इस समय चिंताजनक है, डॉक्टरों ने बताया कि उनके शरीर से पूरा मांस खत्म हो चुका है और वे बेहद कमजोर हो गए हैं, उनका रक्तचाप लगातार गिरता जा रहा है।

किसान नेताओं का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के सभी बयानों को संविधान की सीमाओं में रहकर और उचित भाषा में दिया जा रहा है। इसके साथ ही, किसानों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वे केंद्र सरकार को निर्देश दें कि वह खेती से संबंधित संसदीय समिति की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की समिति की अंतरिम रिपोर्ट को लागू करे। पंजाब और तमिलनाडु से किसानों का एक बड़ा समूह खनौरी किसान मोर्चा में जुटा हुआ है।

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन के संदर्भ में सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने पंजाब सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि डल्लेवाल की हालत को जानबूझकर बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले, सीएम भगवंत मान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहे हैं। डल्लेवाल की देखभाल हेतु 50 डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है और धरना स्थल के निकट अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया गया है।

किसान नेताओं का मानना है कि केंद्र सरकार को अपने अड़ियल व्यवहार को समाप्त करते हुए किसानों से संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब लोगों के साथ अन्याय होता है, तो वे अपनी आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से रखते हैं। किसानों का यह आंदोलन एमएसपी की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष बन चुका है, जो आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बड़े प्रभाव डाल सकता है।