पंजाब के अमृतसर में कांग्रेस पार्टी ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संबंध में की गई एक विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान, कांग्रेस के अमृतसर जिलाध्यक्ष अश्विनी पप्पू ने कहा कि बाबा साहेब का सम्मान किसी भी स्थिति में नहीं छेड़ा जा सकता। प्रदर्शन में वाल्मीकि समाज समेत कई अन्य संगठनों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अमित शाह के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि बाबा साहेब राष्ट्र के संविधान के निर्माता और भारतीय इतिहास के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं। उनके खिलाफ अपमानजनक शब्दों का उपयोग करना देशवासियों के लिए असहनीय है।
कांग्रेस के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर अमित शाह के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उनके द्वारा आरोप लगाया गया कि अमित शाह जिस पद पर बैठे हैं, वह बाबा साहेब द्वारा बनाए गए संविधान की देन है, परंतु वे अपने शक्ति के दुरुपयोग कर उनके सम्मान को ठेस पहुँचा रहे हैं। इस प्रदर्शन में पंजाब के विभिन्न जिलों से कांग्रेस और कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए, जिससे इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ।
वाल्मीकि समाज के नेताओं ने कहा कि बाबा साहेब ने समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष की है, और उनके प्रति की गई अपमानजनक टिप्पणी को किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारी सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि अमित शाह को उनके शब्दों के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए और उन पर कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। विरोध प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस और अन्य संगठनों ने घोषणा की कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में और अधिक तीव्र आंदोलन किए जाएंगे।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि बाबा साहेब ने समानता और न्याय के सिद्धांत की जो नींव रखी थी, उसे कोई भी कमजोर नहीं कर सकता। उनके आदर्शों की रक्षा के लिए देशभर में संघर्ष जारी रहेगा। इस प्रकार का प्रदर्शन न केवल अमृतसर बल्कि पूरे पंजाब में बाबा साहेब के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है। उनका योगदान और संघर्ष समाज के पिछड़े वर्गों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है, जो हमें यह सिखाता है कि हम सच्चाई और न्याय के लिए हमेशा आवाज उठाएं।
अंत में, यह स्पष्ट है कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रति अपमानजनक टिप्पणी ने ना केवल उनके अनुयायियों में आक्रोश पैदा किया है, बल्कि यह एकत्रित संगठनों के माध्यम से सामाजिक न्याय और समानता के सुदृढ़ मानक स्थापित करने के लिए एक मजबूत संदेश भी है। इसके माध्यम से, प्रदर्शनकारी यह दिखाना चाहते हैं कि वे हमेशा अपनी पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए खड़े रहेंगे।