पंजाब के अमृतसर में आम आदमी पार्टी (AAP) ने नगर निगम से दो आजाद पार्षदों को अपने दल में शामिल करके मेयर पद की ओर एक और कदम बढ़ा दिया है। इस महत्वपूर्ण जॉइनिंग अवसर पर पंजाब के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल भी स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों पार्षदों को पार्टी में स्वागत करते हुए औपचारिक रूप से शामिल किया। यह कदम कांग्रेस के लिए नई चुनौतियों का सामना कर सकता है, क्योंकि उनके पास सबसे अधिक पार्षद होने के बावजूद वे मेयर की कुर्सी से दूर होती जा रही हैं।
आपके द्वारा शामिल की गईं पार्षद अनीता रानी (वार्ड नंबर 67) और ऊषा रानी (वार्ड नंबर 63) ने अपनी राजनीतिक यात्रा में इस नए मोड़ को महत्व दिया है। इस अवसर पर मंत्री कुलदीप सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी में जॉइन करने वाले प्रत्येक सदस्य का समुचित सम्मान किया जाएगा तथा उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी में शामिल होने वालों को समान अवसर दिए जाएंगे, जिससे सामान्य कार्यकर्ताओं में प्रोत्साहन मिलेगा।
अनीता रानी और ऊषा रानी ने पार्टी की नीतियों और विचारधारा के प्रति अपने समर्थन को भी स्पष्ट किया। उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी की पारदर्शी कार्यशैली और जनहित में की गई नीतियां उन्हें इस राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। आम आदमी पार्टी ने नगर निगम चुनाव में 24 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भी 50 पार्षदों के समर्थन का दावा किया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस समय यह समर्थन मेयर पद के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पार्टी की रणनीति के अनुसार, वे समय आने पर अपने समर्थनकर्ताओं का नाम साझा करेंगे। हालांकि, इन सभी गतिविधियों और दावों के बीच पार्टी के अंदर भी पदों को लेकर संघर्ष चल रहा है। मेयर पद की दौड़ में कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं, जैसे प्रियंका शर्मा, जसमीत सिंह, अशोक कुमार और नताशा शिव। इन नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक अनुभव और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर मेयर पद पर अपनी दावेदारी है।
आम आदमी पार्टी के हालिया प्रयासों और नई जॉइनिंग के साथ, यह स्पष्ट है कि वे खुद को अमृतसर नगर निगम में मजबूती से स्थापित करने की दिशा में अग्रसर हैं। इस जॉइनिंग ने न केवल पार्टी की ताकत बढ़ाई है, बल्कि कांग्रेस के सामने एक नई चुनौती भी पेश की है। देखना होगा कि आगामी मेयर चुनाव में हालात कैसे बदलते हैं और कौन नेता इस कुर्सी पर बैठ पाता है।