साहित्यिक उत्सव जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की रंगारंग शुरुआत

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साहित्यिक उत्सव जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की रंगारंग शुरुआत

जयपुर, 30 जनवरी (हि.स.)। दुनिया भर में पुस्तकों और विचारों के सबसे भव्य उत्सव के रूप में पहचाने जाने वाले पांच दिन के साहित्यिक उत्सव जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत गुरुवार काे हुई। होटल क्लार्क्स आमेर में तीन फरवरी तक चलने वाले इस उत्सव में देश दुनिया के साहित्यकार-लेखक अनेक विधाओं पर अपनी बात और कहानी कहेंगे। इस फेस्टिवल में दुनिया भर से छह से अधिक स्पीकर्स हिस्सा लेंगे।

18वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत में संगीत, स्वागत भाषण और पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह का मिश्रण था। सुबह की शुरुआत कर्नाटक गायिका सुप्रिया नागराजन की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। फेस्टिवल की सह-निदेशक नमिता गोखले और विलियम डेलरिम्पल ने इस वर्ष के विविध और समावेशी कार्यक्रम के बारे में बात की, जिसमें प्रमुख सत्रों पर प्रकाश डाला गया, जबकि फेस्टिवल प्रोड्यूसर संजय के. रॉय, टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक ने फेस्टिवल की 18 साल की यात्रा पर विचार व्यक्त किए। मंच पर मौजूद गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें अपूर्व और टिम्मी कुमार, वेंकी रामकृष्णन, फेथ सिंह, यूरोपीय संघ के राजदूत महामहिम हर्वे डेल्फिन, संजय और ज्योति अग्रवाल आदि शामिल थे। मुख्य भाषण प्रख्यात आणविक जीवविज्ञानी और नोबेल पुरस्कार विजेता वेंकी रामकृष्णन ने दिया, जिन्होंने कला और विज्ञान के प्रतिच्छेदन पर चर्चा की। उद्घाटन समारोह महात्मा गांधी की याद में दो मिनट के मौन के साथ संपन्न हुआ।

जेएलएफ के 18वें संस्करण के पहले दिन के सत्रों में नोबेल पुरस्कार विजेता एस्तेर डुफ्लो, कैलाश सत्यार्थी, गिदोन लेवी, विलियम डेलरिम्पल इजोमा ओलुओ, गीतांजलि श्री, जावेद अख्तर और वेंकी रामकृष्णन, पूर्व क्रिकेटर माेहिन्दर अमरनाथ, सुधा मूर्ति सहित कई प्रशंसित वक्ताओं ने भाग लिया। सत्रों में लोकतंत्र और समानता, भू-राजनीति, जीवनी और संस्मरण, इतिहास और संस्कृति आदि पर बातचीत सहित कई आकर्षक विषयों और विचारों पर चर्चा की गई, जिसमें सभी के लिए कुछ न कुछ पेश किया गया। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की फेस्टिवल सह-निदेशक नमिता गोखले ने कहा कि हमारा फेस्टिवल, धरती पर सबसे बड़ा साहित्यिक शो, एक अलग तरह की तीर्थयात्रा है। यह विचार और मनन का सम्मेलन है, शब्दों और अर्थ की खोज के लिए एक केंद्र और मंच है। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डेलरिम्पल ने कहा कि मानव जाति की कहानी की शुरुआत से ही साहित्य का सार्वजनिक प्रदर्शन एक दूसरे से जुड़ा हुआ है, लेकिन काफी अलग है और यह कुछ ऐसा है जो भारत में हमेशा से ही खास रहा है। टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजय के. रॉय ने कहा कि आज हम अपने आस-पास जो अंधकार देखते हैं, युद्ध देखते हैं, नफरत देखते हैं जो सब कुछ निगल जाती है, एक चीज जिससे हम सांत्वना पा सकते हैं वह है लेखन और किताबें।

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