कलाग्राम में प्रदर्शित होगी गंगा अवतरण व कुम्भ की कहानी : अमिता सारभाई

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कलाग्राम में प्रदर्शित होगी गंगा अवतरण व कुम्भ की कहानी : अमिता सारभाई

–केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री रविवार को महाकुम्भ मेला में करेगें कलाग्राम का उद्घाटन व प्रेसवार्ता

कुम्भनगर, 11 जनवरी (हि.स.)। भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा महाकुम्भ में संगम की रेती पर विशेष सांस्कृतिक गांव ’कलाग्राम’ की स्थापना की गई है। 12 ज्योतिर्लिगों के आकार में तैयार अनोखे कलाग्राम का उद्देश्य भारतीय लोक कला, संस्कृति और परम्पराओं को जीवंत मंच प्रदान करना है। यह बातें अमिता प्रसाद सारभाई, संयुक्त सचिव संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार ने शनिवार को एनसीजेडसीसी में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। उन्होंने बताया कि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार को शाम 04.15 बजे महाकुम्भ मेला क्षेत्र में कलाग्राम का उद्घाटन व प्रेसवार्ता करेगें। सारभाई ने कहा कि कलाग्राम, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्थापित, नागवासुकी क्षेत्र में भारद्वाज मार्ग पर 10 एकड़ से अधिक में विस्तृत सांस्कृतिक स्थल है। जिसे शिल्प, व्यंजन एवं संस्कृति सहित देश की मूर्त एवं अमूर्त धरोहर के माध्यम से भारत की समृद्ध विरासत को संवर्धित व संरक्षित करने एवं प्रदर्शित करने के लिए निर्मित किया गया है। कलाग्राम महाकुम्भ के दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र बनेगा। इसमें विभिन्न राज्यों की लोक कलाएं, हस्तशिल्प, संगीत, नृत्य और प्रदर्शनियां प्रस्तुत की जाएंगी।

–कला और संस्कृति की विविधता का परिचायक है ‘कलाग्राम’

कलाग्राम में देश भर के कोने-कोने से आए कलाकारों, शिल्पकारों एवं कलाविदों को उनकी असाधारण प्रतिभा एवं चिरकालिक परम्पराओं को प्रदर्शित करने के लिए एक ही छत के नीचे लाने का प्रयास किया गया है। जहां प्रदर्शन, दृश्य एवं साहित्यिक कलाओं के लिए एक ही स्थान पर मंच प्रदान किया गया है। महाकुम्भ के 45 दिनों में, कलाग्राम, गंगावतरण एवं समुद्र मंथन की कथा का वर्णन करने वाले अनुभव क्षेत्रों, महाकुम्भ के विभिन्न पहलुओं को समाहित करने वाले प्रदर्शनी क्षेत्रों, कारीगरों के कौशल, शास्त्रीय एवं लोक कलाकारों के मंत्रमुग्धकारी प्रदर्शन, सात्विक व्यंजनों की सुगन्ध एवं यहां तक कि विशेष खगोल रात्रि के माध्यम से रात्रि के आकाश का अवलोकन करने के अवसर के माध्यम से एक गहन सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा। 635 फीट चौड़े एवं 54 फीट ऊँचे मुख्य प्रवेश द्वार से विस्मित होने के लिए तैयार रहें, जो शिल्प कौशल का एक अद्भुत निर्माण है।

–कलाग्राम में आकर्षण का केंद्र बिंदु हैं आकर्षक थीम पर बने आंगन

वहीं सात क्षेत्रों में हस्तशिल्प की प्रदर्शनी और ब्रिक्री हेतु आकर्षक थीम पर आंगन बनाया गया है। जिसमें उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र विषयः दक्षेश्वर महादेव मंदिर, हरिद्वार, कला एवं शिल्पः नक्काशीदार लकड़ी की मूर्तियाँ, पीतल के शिव लिंगम, हाथ से बुने हुए ऊनी शॉल, रुद्राक्ष मालाएं आदि हैं।

–सांस्कृतिक महाकुम्भ में दिखेगा विविधता में एकता का रंग

आस्था की धरती पर सांस्कृतिक महाकुम्भ का शुभारम्भ 12 जनवरी से होगा। कलाग्राम में समूचे भारत की कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके लिए कलाग्राम, गंगा पण्डाल, झूंसी, नागवासुकी एवं अरैल में विभिन्न मंचों पर 45 दिनों के लिए 14,632 कलाकार, संगीत नाटक अकादमी, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों एवं सीसीआरटी द्वारा आयोजित प्रस्तुतियों में, प्रत्येक दिन पद्म एवं एसएनए पुरस्कार विजेता दिग्गजों से लेकर युवा प्रतिभाओं, लोक नर्तकों की रंगारंग मण्डली, भावपूर्ण शास्त्रीय शैली एवं मनोरंजक सेलिब्रिटी प्रदर्शन, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा मंचित नाट्य प्रदर्शन दर्शकों को मुग्ध करेंगे।

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