फाजिल्का के अरनीवाला क्षेत्र के गाँव बन्नावाला में सिख धर्म के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म दिवस भव्य नगर कीर्तन के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जिले भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। नगर कीर्तन का आयोजन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में पंज प्यारे साहिबान द्वारा किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। इस धार्मिक उत्सव में हर ओर भक्ति की लहर देखने को मिली, जिसने पूरे वातावरण को आनंदित कर दिया।
इस नगर कीर्तन के दौरान गतका पार्टी ने स्पेशल प्रस्तुतियाँ दीं, जिसमें उन्होंने अपनी अद्भुत कला का प्रदर्शन किया। गतका, जो कि सिखों की एक पारंपरिक युद्धकला है, दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अलावा, विशेष दस्तार मुकाबलों का आयोजन भी किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य युवाओं के बीच सिख परंपराओं को जीवित रखना और उन्हें प्रेरित करना था। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले बच्चों को उनकी प्रतिभा के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे उनके मनोबल को और ऊंचाई मिली।
ग्रंथी सिंह अमरीक सिंह ने बताया कि यह नगर कीर्तन गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव को समर्पित था। उन्होंने कहा, “हम सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर इस दिन को खास बनाने का प्रयास किया, ताकि हम सब एकजुट होकर हमारे गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकें।” उन्होंने बताया कि गावों के विभिन्न स्थानों पर लंगर का आयोजन भी किया गया था, जहां श्रद्धालुओं ने सेवा भाव से एक-दूसरे के साथ भोजन की परंपरा का पालन करते हुए भाईचारे की मिसाल पेश की।
इस महान उत्सव ने यह भी दिखाया कि किस तरह सिख समुदाय अपने धार्मिक मूल्यों को बनाए रखते हुए एकजुटता को बढ़ावा देता है। नगर कीर्तन में शामिल हुए श्रद्धालुओं का उत्साह देखा जा सकता था, जो भक्ति में लीन होकर नारे लगाते और पंजाबी गाने गाते हुए चलते रहे। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक भावनाओं को उभारने का कार्य किया, बल्कि युवाओं को सिख आस्था और संस्कृति से जोड़ने का भी संकल्प लिया।
इस तरह, बन्नावाला गाँव में मनाया गया यह नगर कीर्तन न केवल एक धार्मिक समारोह था, बल्कि यह एक सांस्कृतिक महोत्सव भी बन गया, जिसने सभी वर्गों के लोगों को एक जगह इकट्ठा किया। इस अविस्मरणीय अवसर ने सिखों की धरोहर को आगे बढ़ाने और उसे नई पीढ़ी के बीच जीवित रखने का सौभाग्य प्रदान किया।