सोमवार को फरीदकोट के कोटकपूरा में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर एक भव्य नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। इस धार्मिक परंपरा में देश भर के विभिन्न धर्मों के श्रद्धालुओं ने गहरी श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया। नगर कीर्तन की शुरुआत दशम पिताजी गुरु गोबिंद सिंह जी के चरणों में स्थित पवित्र गुरुद्वारा साहिब पातशाही दसवीं छावनी निहंग सिंह से हुई, जहां पंज प्यारों ने अपनी अगुवाई की। इस आयोजन ने धार्मिक एकता और भाईचारे की एक अनुपम मिसाल पेश की।
इस अवसर पर पालकी साहिब में विराजमान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पीछे हजारों श्रद्धालु ‘बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के नारों से वातावरण गुंजायमान कर रहे थे। यह दृश्य एकजुटता और सामुदायिक भावना का प्रतीक था। नगर कीर्तन के मार्ग में विभिन्न संस्थाओं द्वारा श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन किया गया, जिससे कि सभी उपस्थित लोग प्रसाद का लाभ उठा सकें। यह एक व्यापक सामाजिक समर्पण का जाग्रत उदाहरण था, जिसमें सभी धर्मों के लोग बिना भेदभाव के एक साथ आए।
गुरुद्वारा साहिब के मुखी जत्थेदार कुलवंत सिंह ने इस महान आयोजन में भाग लेने वाले सभी सहयोगी संस्थाओं और संगत का दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस नगर कीर्तन ने धार्मिक एकता का संदेश दिया है और यह दर्शाया है कि सभी वर्गों और धर्मों के लोग एक साथ मिलकर प्रेम और भाईचारे के साथ रह सकते हैं। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक क्रिया थी, बल्कि यह समाज में सद्भावना और सहिष्णुता के प्रचार का भी एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस नगर कीर्तन ने स्थानीय समुदाय में एकता और भाईचारे को और मजबूती प्रदान की है। विदित हो कि गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व सिख धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो श्रद्धालुओं को अपने धर्म और संस्कृति की गहराई से जोड़ता है। इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सकारात्मकता और समर्पण का माहौल पैदा होता है, जो कि वैश्विक स्तर पर आपसी समझ और सहिष्णुता को बढ़ावा देता है।
फरीदकोट का यह नगर कीर्तन एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसके द्वारा श्रद्धालुओं ने अपने विश्वास और धर्म का प्रदर्शन किया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक धारा को एक नई दिशा मिलती है और मानवता की सेवा का संकल्प भी अधिक मजबूती से किया जाता है। यह समारोह समाज के विभिन्न तबकों के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।