बीजेपी नेता सुखमिंदर ने जत्थेदार से की अपील: डल्लेवाल का अनशन कैसे खत्म होगा?

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पंजाब के अमृतसर से भारतीय जनता पार्टी के किसान नेता सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल ने हाल ही में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह से महत्वपूर्ण चर्चा की। इस मुलाकात के दौरान, उन्होंने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मरणव्रत अनशन को समाप्त करवाने के लिए जत्थेदार से अनुरोध किया। ग्रेवाल ने यह संकेत भी दिया कि दिल्ली के लोग व्यापार कर सकते हैं, लेकिन पंजाब के मुद्दों का समाधान नहीं कर सकते। उन्होंने जत्थेदार को एक पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने अपनी पहचान को स्पष्ट करते हुए बताया कि वे एक भाजपा के राष्ट्रीय किसान नेता होने के साथ-साथ एक किसान परिवार से भी ताल्लुक रखते हैं।

गौरतलब है कि किसान मोर्चा के प्रमुख नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर 2024 से खनौरी बॉर्डर पर अपने अधिकारों के लिए आमरण अनशनरत हैं। सुखमिंदर ने अपने गांव भुखरी कलां, लुधियाना से 19 दिसंबर 2024 को डल्लेवाल से मिलने की कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश, जब वे वहां पहुंचे, तब डल्लेवाल अचानक बेहोश हो गए और उल्टियाँ करने लगे। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत मदद की, जिससे ग्रेवाल और डल्लेवाल की बातचीत संभव नहीं हो सकी। ग्रेवाल ने अपनी चिंताओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि डल्लेवाल ने कुछ नेताओं के प्रोत्साहन पर अनशन करने का निर्णय लिया है।

डल्लेवाल का अनशन अब 45 दिनों में प्रवेश कर चुका है और उनकी तबियत बेहद खराब है। सुखमिंदर ने इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि हड़ताल पर बैठे किसानों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए और तुरंत अनशन समाप्त करना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि डल्लेवाल एक महत्वपूर्ण किसान नेता हैं, जिनकी जान की सुरक्षा का जिम्मा श्री अकाल तख्त को लेना चाहिए और उन्हें अनशन खत्म करने के निर्देश देने चाहिए।

इस बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम भी आया, जो ग्रेवाल के पुराने मित्र हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार कृषि संबंधी मुद्दों को गंभीरता से ले रही है। इस प्रकार, सुखमिंदर पाल सिंह ग्रेवाल ने न केवल डल्लेवाल के स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताई है बल्कि पंजाब के किसानों की समस्याओं को उच्च स्तर पर उठाने की भी कोशिश की है। यह स्पष्ट है कि कृषि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर विभिन्न नेताओं का ध्यान केंद्रित होना आवश्यक है, ताकि किसानों के लिए प्रभावी समाधान निकाले जा सकें।