बठिंडा हमले पर हंगामा: दोषियों की गिरफ्तारी और 10 लाख मुआवजे की मांग!

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बठिंडा में हाल ही में मजदूरों पर हुए हमले के खिलाफ जबर विरोधी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज डिप्टी कमिश्नर से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल ने दान सिंह वाला गांव में मजदूरों के साथ हुए अत्याचार, उनके घरों में आगजनी करने और उन पर मारपीट करने वाले आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। इस मुलाकात से पहले प्रतिनिधिमंडल ने एक रैली भी आयोजित की, जिसमें वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे मजदूरों पर जानबूझकर हमला किया गया। अधिकारियों का तर्क था कि घटना दो परिवारों के बीच की दुश्मनी का परिणाम है, जिसके जरिए वे दोषियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने घटनास्थल पर मौजूद पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा, घायलों के मुफ्त इलाज और किये गए नुकसान का सामान वापस दिलाने की भी मांग की। इस मुद्दे को लेकर समुदाय की भावनाएँ बेहद तीव्र हैं, और ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन को इस समस्या के समाधान के प्रति गंभीर दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। डिप्टी कमिश्नर ने इस पर आश्वासन दिया कि वह दोषियों की गिरफ्तारी के लिए कदम उठाएंगे और मुआवजे के मुद्दे पर भी विचार करेंगे।

इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने 17 फरवरी को दान सिंह वाला गांव में एक बड़ी रैली का आयोजन करने की योजना बनाई है, ताकि इस मुद्दे पर अधिक जन समर्थन जुटाया जा सके। इस रैली में विभिन्न किसान संगठनों, मजदूर संगठनों के नेताओं और अन्य सामाजिक समूहों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन संगठनों का उद्देश्‍य है कि वे पीड़ितों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करें और सरकार पर दबाव डालें ताकि समाज में न्याय और अधिकारों की रक्षा हो सके।

गांव में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और स्थानीय लोग आगामी रैली के प्रति उत्साही हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह रैली सरकार का ध्यान आकर्षित कर सकेगी और अपराधियों को सजा दिलाने में मददगार साबित होगी। प्रदर्शनकारियों की भावना स्पष्ट है कि वे अपने अधिकारों के लिए खड़े रहेंगे, और किसी भी प्रकार की अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।

इस प्रकार, बठिंडा के दान सिंह वाला गांव में हुई घटना ने न केवल स्थानीय मजदूरों को प्रभावित किया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने का एक कारण बन रहा है। सभी की नजर अब इस रैली पर है, जहाँ मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और उनके प्रति हो रहे अत्याचारों का मुद्दा एक बार फिर उठाया जाएगा।