पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने आज एक महत्वपूर्ण औचक दौरा करते हुए अजनाला शुगर मिल का निरीक्षण किया। इस दौरे के दौरान उन्होंने गन्ने के सीजन में चल रही खरीद प्रक्रिया का ध्यानपूर्वक अवलोकन किया और किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुना। मिल के अधिकारियों और स्थानीय किसान समुदाय के साथ चर्चा करते हुए, धालीवाल ने सरकार की ओर से शुगर मिल की क्षमता में सुधार और आधुनिकीकरण की आवश्यकताओं पर जोर दिया। उनका कहना था कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही मिल की क्षमता में विस्तार किया जाएगा।
धालीवाल ने स्पष्ट किया कि अजनाला शुगर मिल में नई मशीनरी का कार्यान्वयन किया जाएगा, जिससे गन्ने की सप्लाई में कोई रुकावट न आए। उनके अनुसार, इससे क्षेत्र में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलने की संभावना है, जो किसानों के विकास में सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने उल्लेख किया कि इससे पहले बटाला और गुरदासपुर स्थित शुगर मिलों की क्षमता भी बढ़ाई जा चुकी है और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से इस विषय पर चर्चा की जा चुकी है। धालीवाल ने आश्वासन दिया कि इस परियोजना को शीघ्र संपन्न किया जाएगा।
किसानों के साथ बैठक के दौरान, मंत्री धालीवाल ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार उनकी समस्याओं को उच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने किसानों को बताया कि शुगर मिल में गन्ने की पिराई प्रक्रिया सुचारू बनी हुई है और उन्हें समय पर अपने फसल का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब की शुगर मिलों में उत्पादित चीनी की गुणवत्ता राज्य में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। धालीवाल ने किसानों से अपील की कि वे सरकार पर भरोसा रखें और मिलकर कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाएं।
हालांकि, मंत्री धालीवाल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसानों की आवश्यक मांगों को अब तक अनसुना किया गया है। उनका आक्षेप था कि किसानों के लिए जो आर्थिक संसाधन संवितरित किए जाने चाहिए थे, उन्हें बड़े उद्योगपतियों जैसे अंबानी और अडाणी के स्वास्थ्य में लगाया गया है। इस स्थिति का परिणाम यह है कि किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार विकट हो रही है।
धालीवाल ने किसानों के प्रदर्शनों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा कि यह संकट मुख्य रूप से केंद्र सरकार की अड़ियल नीतियों के कारण उत्पन्न हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वे किसानों से संवाद स्थापित करें और उनकी लंबित मांगों को तुरंत लागू करने का प्रयास करें, ताकि किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके। यह स्पष्ट है कि मंत्री धालीवाल का यह दौरा न केवल सरकारी नीतियों को स्पष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि किसानों को आश्वस्त करने का भी एक प्रयास था, ताकि वे खेती में और अधिक मजबूती से आगे बढ़ सकें।