अनूपपुर: सोमवती अमावस्या पर नर्मदा उद्गम में स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
अनूपपुर, 30 दिसंबर (हि.स.)। सोमवती अमावस्या पर अनूपपुर जिले के अमरकंटक में नर्मदा उद्गम में स्नान के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। नर्मदा घाटों पर सुबह 6 बजे से चहल-पहल बढ़ गई। सर्द हवा के थपेड़ों के बीच श्रद्धालु नर्मदा घाट पहुंचे। स्नान कर शिवालयों में जल चढ़ाकर दान पुण्य किया। इस साथ ही जिला मुख्यांलय में सोन नद सहित चंदास, बकान नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर नर्मदा मंदिर में दर्शन किया।
पंडितों के अनुसार वर्ष का आखिरी सोमवती अमावस्या है। इसके अलावा 2025 में भी सोमवार को सोमवती अमावस्या के योग नहीं बन रहे हैं। इसलिए स्नान दान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है। नर्मदा स्नान दान व मंदिरों में दर्शन का सिलसिला जारी हैं। वहीं पति की लम्बी आयु कामना लिए महिलाओं ने सोमवती अमावस्या पर किए पीपल वृक्ष का विशेष पूजन करते हुए 108 परिक्रमा लगाते हुए कामना के सूत्र बांधे। इस विधि में हर फेरे में महिलाओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ईष्टदेव से मन्नते मांगी।
अमावस्या पंचांग के अनुसार माह की 30वीं और पौष मास की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि जिस दिन चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता, उस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व रहा है। हर माह की अमावस्या को कोई न कोई पर्व के रूप में अवश्य मनाया जाता हैं। सोमवार को पडऩे वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के रूप मनाने की प्रथा है। सोमवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लम्बी आयु और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लिए सोमवती अमावस्या का पावन व्रत किया। सुबह से ही महिलाओं ने निर्जला व्रत करते हुए नगर के मुख्य पीपल वृक्षों के तनों में अक्षय सूत्र के 108 परिक्रमा लगाते हुए कामना के सूत्र बांधे। इस विधि में हर फेरे में महिलाओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ईष्टदेव से मन्नते मांगी। इस दौरान महिलाओं ने जड़ों में फल-फूल चढ़ाकर हवन-धूप भी किया। माना जाता है कि सोमवती अमावस्या का अपना ही महत्व होता है।
वहीं जिले के कोतमा, बिजुरी, पसान, जैतहरी, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक सहित नगरो ग्रामों में सोमवती अमावस्या पर सुबह से ही सुहागिन महिलाओं द्वारा मंदिरो एंव वृक्षों की परिक्रमा के साथ पूजा पाठ किया गया। इस मौके पर पीपल, तुलसी सहित अन्य दूसरे वृक्षों में भी 108 फेरी लगाने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पूजा करने का उद्देश्य पति की लम्बी आयु के साथ परिवारिक समृद्धि की कामना होती है। जैतहरी में भी इस मौके पर महिलाओं ने नगर के राम मंदिर, सत्यनारायण मन्दिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर सहित मुख्य मन्दिरो में एकत्र होकर पूजा अर्चना की। तुलसी व वासुदेव की परिक्रमा विधि विधान से कर उनकी विशेष पूजा की।
अमरकंटक में श्रद्धालुओं ने नर्मदा में लगाई डुबकी
पवित्र नगरी अमरकंटक में पौषी अमावस्या पौष मास की सोमवती अमावस्या पर सौभाग्यवती सुहागिन महिलाओं ने पति पुत्रों संतान तथा परिवार एवं समाज के सुदीर्घ यशस्वी मंगलमय स्वस्थ जीवन की कामना के लिए पीपल के वृक्ष की परिक्रमा लगाई । पंडित राजेश पाठक ने बताया कि सोमवती अमावस्या के शुभ पावन अवसर पर महिलाओं के द्वारा पीपल वृक्ष का प्रशिक्षण किया जाना उनके मन वांछित मनोकामना की पूर्ति करता है तथा पति संतान तथा परिवार समाज के सुख समृद्धि यशस्वी एवं लंबे जीवन की कामना प्रदान करता है यह वर्ष में दो-तीन ही बार आता है। सोमवती अमावस्या अति शुभ फलदाई है और खासकर पौष मास की अमावस्या तो अति उत्तम श्रेष्ठ है सभी मनोकामना पूर्ति करता है।
पौष मास की सोमवती अमावस्या पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं तीर्थ यात्रियों ने पावन सलिल मां नर्मदा जी के कोटि तीर्थ, गांधी कुंड, रामघाट, पुष्कर तट तथा अरंडी संगम नर्मदा तट में पुण्य डुबकी लगा स्नान दर्शन पूजन अर्चन अभिषेक कर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा नर्मदा मंदिर में दर्शन लाभ लिया।