हमारा चित ईश्वर की भक्ति रस से भरा हो: स्वामी दिव्यानंद गिरी 

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हमारा चित ईश्वर की भक्ति रस से भरा हो: स्वामी दिव्यानंद गिरी 

खूंटी 24 दिसंबर (हि.स.)। आर्ट ऑफ़ लिविंग परिवार द्वारा आयोजित श्रीमदभागवत महापुराण कथा के छठे दिन स्वामी दिव्यानंद गिरी ने व्यास पीठ से कहा कि भगवान ने भागवत में माखन चोरी की लीला द्वारा भगवान ने गोपियों के चित चुराने की लीला की। हमारा चित हमेशा संसार की आशक्ति और माया में डूबा रहता है, जिसके कारण जैसे हवा गंध को एक से दूसरी जगह ले जाती है, वैसे ही मृत्यु के पश्चात भी चित रूपी मन आशक्तियों को या विषय रूपी रस की अनुभूति को एक शरीर से दूसरे शरीर ले जाती है। इससे मुक्त होने के लिए सरलतम उपाय है कि हमारा चित ईश्वर की भक्ति रस से भरा हो।

उन्हाेंने कहा कि अक्सर मनुष्य कहता है कि मुझे पूजा पाठ का समय नहीं है, लेकिन गोपियां भी मनुष्य थीं, परिवार था, व्यस्त थी, फिर भी उन्होंने अपने मन में संसार को नहीं, श्रीकृष्ण को बसाया और व्यस्तता के बाद भी श्रीकृष्ण की भक्ति की वैसे ही हम अपना कर्म करते हुए ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं यही भागवत है। मुख्य यजमान मनोरमा भगत, आशुतोष भगत, पुष्पा तिवारी, सिंधु भगत, कैलाश भगत, अनीता लाल, जददू लाल, संगीता राय, नंद राय, प्रमिला भगत, राजेंद्र भगत, शकुंतला जायसवाल, महेंद्र जायसवाल, सिंपल मलिक नें भागवत पूजन और व्यास गद्दी पूजन किया। यह जानकारी आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक आशु शाहदेव ने दी।

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