पंजाब में सर्दी के बढ़ते असर को देखते हुए राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों की छुट्टियों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है। सरकार ने 7 जनवरी तक छुट्टियों का ऐलान किया है, जिससे छोटे बच्चे इस सर्द मौसम में आंगनवाड़ी केंद्रों में नहीं आ पाएंगे। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि ठंड के चलते छोटे बच्चों का केंद्रों में आना काफी कठिनाई भरा होता है। इस परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए, पंजाब सरकार ने यह निर्णय लिया है कि 3 से 6 वर्ष के बच्चों को 7 जनवरी से आंगनवाड़ी केंद्रों में लाने की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए आवश्यक राशन को उनके घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की है ताकि वे माताओं और बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण सुनिश्चित कर सकें। सरकार का मानना है कि यह कदम बच्चों की देखभाल और पोषण के लिए बेहद आवश्यक है, विशेषकर सर्दियों के इस मौसम में। इस परिस्थिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें बच्चों के लिए घर पर राशन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
पंजाब सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों के उन्नयन का भी कार्य शुरू कर दिया है। 31 जनवरी 2025 तक कुल 350 आंगनवाड़ी केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना है। डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि यह काम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत किया जा रहा है, जिसके लिए प्रत्येक केंद्र का निर्माण 12 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। अपग्रेड किए गए केंद्रों में बच्चों और माताओं के पारिवारिक विकास के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जैसे उचित फ्लोरिंग, पेंटिंग, प्लंबिंग, बिजली और लकड़ी का काम।
कैबिनेट मंत्री ने यह भी बताया कि 53 आंगनवाड़ी केंद्र पहले ही तैयार हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि पंजाब में प्रयोग की जाने वाली सुविधाओं में गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है। मंत्री ने इन परियोजनाओं के महत्व को समझाते हुए कहा कि आंगनवाड़ी सेवाओं को मजबूत करने से बच्चों और माताओं के लिए पोषण और देखभाल केंद्रों का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, जिससे उनके समग्र विकास में योगदान मिलेगा।
इस प्रकार, पंजाब सरकार के इन कदमों से सुनिश्चित होगा कि बच्चे सुरक्षित और संतुलित पोषण प्राप्त कर सकें और उन्हें आवश्यक देखभाल मिल सके। यह पहल न केवल बच्चों के विकास को बढ़ावा देगी बल्कि माताओं के लिए भी एक सहायक वातावरण तैयार करेगी।