मोहाली में गन कल्चर पर शिकंजा: सोशल मीडिया सेल ने बदमाशों पर कसा शिकंजा!

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मोहाली पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा करके गन कल्चर को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कठोर कदम उठाना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनकी सोशल मीडिया सेल इस प्रकार के मामलों पर लगातार नजर रख रही है और आरोपी की पहचान होने पर तुरंत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में मटौर थाना पुलिस ने इस संबंध में एक महत्वपूर्ण मामला दर्ज किया है, जिसमें आरोप जनाब गुरविंदर सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 125 और 223 के तहत कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई सोशल मीडिया सेल द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर आधारित है।

सोशल मीडिया सेल के प्रमुख ने बताया कि “गुरी चहल” नामक एक इंस्टाग्राम आईडी पर एक वीडियो साझी की गई थी, जिसमें गन कल्चर का खुलकर प्रचार किया गया है। वीडियो में आरोपी को पुलिस की यूनिफॉर्म में अन्य व्यक्तियों के साथ मिलकर हथियारों का प्रदर्शन करते देखा गया। इस वीडियो को पुलिस ने प्रमानिक सबूत के रूप में अपने रिकॉर्ड में शामिल किया है, और एक शिकायत भी दर्ज की गई है।

पुलिस द्वारा जानकारी दी गई है कि गन कल्चर को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। इसमें न केवल उन्हें गिरफ्तार करना शामिल है, बल्कि उनके द्वारा रखे गए हथियारों के लाइसेंस को भी रद्द करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे हथियारों का प्रदर्शन करने या गन कल्चर को प्रमोट करने वाले कार्यों में भाग न लें। ऐसा करना न केवल समाज के लिए अत्यधिक हानिकारक है, बल्कि यह कानून का उल्लंघन भी है।

सोशल मीडिया पर होने वाली इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त पाया गया, तो उसे जल्दी ही दंडित किया जाएगा। पुलिस प्रशासन का उद्देश्य समाज में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है, जहां हथियारों का प्रदर्शन और गन कल्चर को बढ़ावा देना अपराध की श्रेणी में आता हो। पुलिस द्वारा उठाए गए इस कदम से स्पष्ट संकेत मिलता है कि कानून का पालन करने वालों को समुचित सुरक्षा मिलेगी, जबकि कानून का उल्लंघन करने वालों को गंभीर परिणाम का सामना करना पड़ेगा।

समाज में गन कल्चर को प्रोत्साहित करने के लिए कोई भी प्रयास अत्यंत गंभीर माना जाएगा। पुलिस का यह प्रयास न केवल रोकथाम के लिए है, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए भी है ताकि समाज में संवेदनशीलता बढ़े और लोग ऐसे कार्य करने से परहेज करें। इस प्रकार की पुलिस कार्रवाई से यह संदेश भी निकलता है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी सामाजिक स्थिति में हो, कानून से ऊपर नहीं है और सभी को अपने कार्यों का जिम्मेदार बनना होगा।