पंजाब बंद के कारण मोगा के बाजार रहे ठप, सड़क और रेल यातायात बाधित!

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किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर किसान संघटनों ने पंजाब बंद का आह्वान किया है, जिसका प्रभाव आज मोगा में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। यहां सभी बाजार पूरी तरह बंद रहे और सड़क व रेल यातायात में भी भारी रुकावट आई। यह ध्यान देना चाहिए कि किसान लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इस आंदोलन के मुख्य चेहरे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल हैं, जो लगातार मरण व्रत रखे हुए हैं ताकि उनकी आवाज को और भी बल मिल सके।

मोगा में इस बंद का काफी प्रभाव देखा गया। बाजारों के अलावा, मोगा के प्रमुख चौक को भी किसानों ने बंद कर दिया, जिससे यहां की सामान्य गतिविधियां ठप हो गईं। किसान नेताओं द्वारा घोषित इस बंद में किसानों की एकजुटता और उनकी मांगों के प्रति दृढ़ संकल्प दिखाई दे रहा है। हालांकि, प्रशासन ने कोशिश की है कि जगजीत सिंह डल्लेवाल को जबरन अस्पताल में भर्ती करवाया जाए, जिसके खिलाफ किसानों के बीच भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया है।

किसानों का यह आंदोलन उनकी लंबित मांगों के प्रति केंद्र सरकार की ओर ध्यान आकर्षित करने का एक प्रयास है। कृषि नीति में सुधार, एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी, और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आंदोलनरत किसान अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं। किसानों का मानना है कि उनकी आवाज को अनसुना किया जा रहा है, जिससे उनका धैर्य टूटता जा रहा है।

किसान आंदोलन की यह लहर केवल पंजाब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे पूरे देश में समर्थन मिल रहा है। मोगा में बंद के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है, और प्रशासन की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। कई स्थानों पर सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

इस संदर्भ में यह भी कहा जा सकता है कि किसान संगठनों और सरकार के बीच वार्तालाप की आवश्यकता सही समय पर समझी जाए। किसान एकत्र होकर अपनी मांगें उठाते रहेंगे, जब तक कि उन्हें न्याय नहीं मिलता। यह आंदोलन यह स्पष्ट करता है कि जब तक किसानों की आवाज सुनी नहीं जाएगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। किसान जुड़े रहने का संकल्प लिए हुए हैं और उनका यह प्रदर्शन उनके हक की लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आने वाले समय में भी जारी रह सकता है।