सोमवार को पंजाब में किसानों ने सुबह 7 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक ‘पंजाब बंद’ के लिए एकत्रित हो गए, जिससे समूचे क्षेत्र में रुकावटें आईं। किसानों ने विभिन्न हाईवे और रेलवे ट्रैक पर धरना प्रदर्शन किया, जिसका सीधा असर यातायात और परिवहन सुविधाओं पर पड़ा। बंद के चलते भारतीय रेलवे ने वंदे भारत सहित 163 ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने बताया कि राज्य के लगभग 270 स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित किए गए, जिसके कारण बसों और ट्रेनों के यात्रियों को काफी कठिनाई झेलनी पड़ी।
इस दौरान, ट्रेनें कैंसिल होने के कारण कई यात्री होटल में रुकने के लिए मजबूर हो गए। पंजाब बंद के चलते पेट्रोल और गैस पंपों के साथ-साथ कई बाजार भी बंद रहे। हालांकि, लुधियाना का प्रसिद्ध चौड़ा बाजार खुला रहा, जो स्थानीय व्यापारियों के लिए राहत की बात रही। लुधियाना और जालंधर में किसानों और पुलिस के बीच कई बार तीखे वाद-विवाद भी देखने को मिले। जालंधर में, एक दूल्हे की गाड़ी को भी किसानों ने रोका, लेकिन जब दूल्हे ने किसान संगठन का झंडा थाम कर किसानों के खिलाफ नारे लगाए, तब उन्हें जाने दिया गया।
किसानों ने चार बजे के बाद रास्ते खोल दिए, जिसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी। बंद से संबंधित घटनाओं की कई तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें पुलिस की अलर्ट स्थिति, किसानों द्वारा हाईवे पर किए गए जाम, रेलवे ट्रैक पर बैठकर किया गया विरोध, और विभिन्न स्थानों पर पसरा सन्नाटा शामिल हैं। रेलवे स्टेशन पर यात्री लंबे समय तक ट्रेन का इंतजार करते रहे, और कई महिलाएं भी इस प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल हुईं।
बंद के दौरान पंजाब में विभिन्न स्थल ऐसे भी थे जहां पर इसका असर कम दिखाई दिया। उदाहरण के लिए, कुछ इलाकों में लोग अपने सामान्य कार्यों में लगे रहे। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए। Farmers ने प्रतीकात्मक रूप से अपनी एकता को प्रदर्शित करते हुए गोल्डन गेट के बाहर नारेबाजी की।
इस आंदोलन ने एक बार फिर से किसानों की समस्याओं और उनके अधिकारों पर ध्यान केंद्रित किया है। पंजाब के इस बंद ने न केवल राज्य में बल्कि सम्पूर्ण देश के किसानों की आवाज को मजबूती देने का काम किया है। किसानों की एकता का यह प्रदर्शन यह संकेत देता है कि वे अपने हकों के लिए हमेशा खड़े रहेंगे।