डॉ. मनमोहन सिंह, एक ऐसे नाम हैं जिनकी आर्थिक समझ की दुनिया भर में सराहना की जाती है। उनके जीवन की शुरुआत और शिक्षा में रुचि के पीछे एक दिलचस्प कहानी छिपी हुई है। यह वाकया 2018 में सामने आया जब डॉ. मनमोहन सिंह अमृतसर के हिंदू कॉलेज की एलुमनी मीट और कनवोकेशन के मौके पर बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। उनका यह कॉलेज, उनकी शिक्षा की पहली मंजिल रहा, जहां उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के बलबूते पर विशेष पहचान बनाई।
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को पंजाब के गाह गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। 1947 में विभाजन के समय उनकी परिवार को सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा और वे अमृतसर में बसी। यहाँ उन्होंने 10वीं कक्षा के बाद स्नातक की पढ़ाई के लिए हिंदू कॉलेज का चयन किया। एलुमनी मीट के दौरान, मनमोहन सिंह ने याद करते हुए कहा कि उन्होंने 1948 में कॉलेज में दाखिला लिया था और पहले स्थान पर आए थे। उस समय के प्रिंसिपल संत राम ने उन्हें रोल कॉल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया था, जिससे उनकी पढ़ाई का स्तर और भी स्थापित हुआ।
कॉलेज की पढ़ाई के दौरान, डॉ. मनमोहन सिंह के पास विभिन्न विषयों पर मजबूत पकड़ थी। लेकिन जब ग्रेजुएशन के लिए विषय चुनने की बारी आई, तो उनके शिक्षकों ने उन्हें इकोनॉमिक्स की सलाह दी। उन्होंने अपनी शिक्षा के दौरान अर्थशास्त्र में विशेष रुचि विकसित की और इस विषय में बीए ऑनर्स में दाखिला लिया। उनकी समझ और ज्ञान ने उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बना दिया। 2018 की एलुमनी मीट में उन्होंने अपने शिक्षकों को श्रेय देते हुए कहा कि उनकी सलाह ने जीवन में आर्थिक मुद्दों की गहरी समझ विकसित करने में मदद की।
डॉ. मनमोहन सिंह ने कॉलेज के दिनों के कई रोचक किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि वे हमेशा लाइब्रेरी में रहते थे और फिल्मों की बातें उन्हें आकर्षित नहीं करती थीं। सुदर्शन कपूर जैसे उनके सहपाठियों ने बताया कि डॉ. सिंह की संवाद शैली काफी प्रभावशाली थी, जो उन्हें प्रतियोगिताओं में विजय दिलाने में सक्षम बनाती थी। हालांकि, जब बात फिल्मों की आती थी तो वे हमेशा शरमा जाते थे।
अपने कॉलेज के दिनों की यादें साझा करते हुए, डॉ. मनमोहन सिंह ने उन दो सहपाठियों को भी याद किया जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में महानता हासिल की। उन्होंने अपने प्रिंसिपल और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया, जिनका योगदान उनकी सफलता में अहम था। उनका यह भावुक क्षण यह साबित करता है कि चाहे समय कितना भी बीत जाए, पुरानी यादें और रिश्ते हमेशा दिल के करीब रहते हैं।
अंततः, डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने जीवन पर प्रकाश डालते हुए यह बताया कि शिक्षा का महत्व और सही मार्गदर्शन किस प्रकार किसी व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुँचाने में सहायक होता है। उनकी यह कहानी प्रेरणादायक है और यह दर्शाती है कि अगर एक व्यक्ति सही दिशा में मेहनत करे, तो दुनिया उसे पहचानने में कभी कसर नहीं छोड़ेगी।