किसान संगठनों के आह्वान पर आज पंजाब बंद का आयोजन किया गया है, जिसका प्रभाव बठिंडा में भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यहां किसान जत्थेबंदियां घनैया चौक पर धरना दे रही हैं। वहीं, एक दूल्हा, बलजिंदर सिंह, अपने वैवाहिक समारोह के बीच किसान आंदोलन के समर्थन में शामिल हुआ है। बठिंडा के घनैया चौक पर आयोजित धरने में भाग लेते हुए बलजिंदर ने कहा कि भले ही आज उसकी शादी हो रही है, लेकिन वह और उसका परिवार इस समय किसानों के साथ खड़े हैं।
दूल्हे बलजिंदर सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात को व्यक्त किया कि आज उसके लिए यह गर्व की बात है कि वह शादी के समारोह में भी किसानों के आंदोलन को समर्थन दे रहा है। उन्होंने कहा, “आज पूरा पंजाब बंद है, और मैं अपनी शादी के लिए निकल रहा हूं। मुझे गर्व है कि मेरा परिवार इस समय किसानों के साथ है और उनके हक के लिए आवाज उठा रहा है।” बलजिंदर ने यह भी बताया कि वे मुक्तसर से अपनी दुल्हन को लेने जा रहे हैं और रास्ते में किसी तरह की बाधा महसूस नहीं हुई।
बठिंडा में किसानों के धरने का असर स्थानीय बाजारों पर भी पड़ा है। दुकानदारों ने ऐतिहासिकता को ध्यान में रखते हुए अपनी दुकानें बंद रखीं, जिससे बाजार सुनसान दिखाई दे रहे हैं। वहीं, रेलवे स्टेशन पर भी बड़े पैमाने पर ट्रेनें खड़ी दिखाई दीं, जो भारतीय किसान आंदोलन के समर्थन में लोगों के एकजुटता को दर्शाती है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में चल रहा यह धरना लगभग 35 दिनों से जारी है।
धरना दे रहे किसानों ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से अपनी मांगें रखी हैं, जिसमें उनकी फसलों के उचित मूल्य की सुनिश्चितता शामिल है। उनका कहना है कि पहले भी जब उन्होंने प्रदर्शन किया था, तब भी मोदी सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार किया था, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया। इसलिए वे आज फिर से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। किसान यह स्पष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं कि उनकी जीवन स्थिति में सुधार के लिए उनके हक की मांगें पूरी की जानी चाहिए।
किसान आंदोलन की इस अवधि में आम लोगों ने भी समर्थन देने का फैसला किया है और यह दिखाते हुए कि जब किसान साथ होते हैं, तो समाज भी उनके साथ होता है। पंजाब बंद के जरिए किसानों का यह संदेश साफ है कि वे अपनी मांगों के प्रति दृढ़ हैं और किसी भी कीमत पर अपने हक के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। इस आंदोलन से यह स्पष्ट होता है कि पंजाब के किसान अपनी आवाज उठाने में सक्षम हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार हैं।