रचनात्मकता पर केंद्रीत सोनीपत में आयाेजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी  

Share

रचनात्मकता पर केंद्रीत सोनीपत में आयाेजित राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी  

सोनीपत, 27 दिसंबर (हि.स.)। हरियाणा

खेल विश्वविद्यालय राई में 51 राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का दूसरा दिन विज्ञान

और रचनात्मकता पर केन्द्रीत रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों

को विभिन्न सेमिनार सत्रों के माध्यम से बाल वैज्ञानिकों को वैज्ञानिक शोध के नए तरीके,

नए मॉडल, नई परिकल्पनाएं, नए सिद्धांत, नए उपकरण, नए प्रयोग जैसे रचनात्मक कार्यों,

विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया। पूर्व

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया गया। इस गहन परिस्थिति का

सम्मान करते हुए कोई भव्य उत्सव आयोजित नहीं किया गया और फूलों जैसे प्रतीकात्मक संकेतों

का उपयोग नहीं किया गया। प्रदर्शनी के दूसरे दिन को शांत और सम्मानपूर्ण शैक्षिक कार्यक्रमों

के माध्यम से मनाया गया, जो इस अवसर की गंभीरता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय

बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी केक दूसरे दिन की शुरूआत विज्ञान और रचनात्मकता पर ध्यान केंद्रित

करते हुए की गई, इसमें राज्य और देशभर से आए छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया, जिससे

प्रेरणा और समृद्धि का माहौल बना। दिन की शुरुआत प्रेरणादायक विज्ञान वार्ताओं की एक

श्रृंखला से हुई। आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग की प्रोफेसर जोई घोष ने क्वांटम संचार

पर एक यात्रा कराई। उनका सत्र, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आधुनिक अनुप्रयोगों के

साथ जुड़ा था ने छात्रों में जिज्ञासा को प्रज्वलित किया।

एनसीईआरटी

के प्रोफेसर अनुप राजपूत ने कंप्यूटेशनल थिंकिंग के आकर्षक क्षेत्र का परिचय दिया।

इस कौशल को समस्याओं को हल करने और विश्लेषणात्मक क्षमताओं को आकार देने के लिए आवश्यक

बताया। एनसीईआरटी की प्रोफेसर रुचि वर्मा की वार्ता खेल-खेल में विज्ञान के साथ समाप्त

हुआ। उन्होंने सरल गतिविधियों और प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान सीखने को एक इंटरएक्टिव

और आनंददायक अनुभव में बदलने के तरीके दिखाए। छात्रों ने व्यावहारिक तरीकों से जटिल

वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने के लिए उत्साहपूर्वक भाग लिया। इन प्रेरणादायक

वार्ताओं में हरियाणा के कुरुक्षेत्र, भिवानी, सिरसा और फरीदाबाद जिलों के 9वीं से

12वीं कक्षा के 6300 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, 29 राज्यों के

400 प्रदर्शकों ने कार्यक्रम में भाग लिया, जिससे विचारों और नवाचारों का एक सजीव संगम

बना।

—————