उत्तर भारत में हाल के दिनों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ती जा रही है, विशेष रूप से हवा के दिशा में आए बदलाव के कारण। हवा का रुख पूर्व की ओर आने के साथ ही हरियाणा के 19 विभिन्न शहरों में वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई है। यहाँ तक कि कुछ ही घंटों में वायु गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक पहुँच रही है। चंडीगढ़ का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लगातार 200 के ऊपर बना हुआ है, जबकि पंजाब के छह शहरों में प्रदूषण स्तर सामान्य से लगभग 6 गुना अधिक है। अब पराली जलाने के साथ-साथ पटाखों से निकलने वाले धुएं भी लोगों की सांसें भरने में योगदान कर रहे हैं, जिससे डॉक्टरों के पास सांस संबंधित बीमारियों और एलर्जी के मामलों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
अमृतसर के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. बृज सहगल के अनुसार, अक्टूबर से पहले जहां रोजाना 4-5 मरीज उनके पास आते थे, वही संख्या अब बढ़कर हर दिन 50 से अधिक हो गई है। इनमें खांसी, जुकाम, अस्थमा और अन्य एलर्जी से परेशान मरीज शामिल हैं। गुरुग्राम का एक्यूआई 500 तक पहुँच चुका है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि हरियाणा के 19 शहरों की हवा अब सांस लेने के योग्य नहीं है। ये सभी शहर ओरेंज कैटेगरी में आते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। उसी तरह, भिवानी, अंबाला, और अन्य शहरों में भी प्रदूषण के रिकॉर्ड स्तर देखे जा रहे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जा रहा है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए, उपयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता है। हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, और हाल ही में 5 किसानों पर दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। राज्य के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि अब तक 273 मामले पराली जलाने के दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 458 मामले सेटेलाइट के माध्यम से सामने आए हैं। जिससे यह पता चलता है कि समस्या कितनी गंभीर है। इसके साथ ही, पंजाब में भी पराली जलाने के 262 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल मामलों की संख्या हज़ारों में पहुँच चुकी है।
भारत के विभिन्न राज्यों में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने के लिए, अधिकारियों ने कायदे-कानूनों के खिलाफ कार्रवाई की है। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान समेत अन्य राज्यों में पराली जलाने के मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंगलवार को छह राज्यों में कुल 963 मामलों की पहचान की गई, जिससे इस सीजन में कुल मामलों का आंकड़ा 10,694 तक पहुँच गया है। यह स्पष्ट है कि यदि उचित कदम न उठाए गए, तो वायु प्रदूषण की समस्या में और अधिक वृद्धि हो सकती है, जिससे आम जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।