पंजाब यूनिवर्सिटी में हिंसक आंदोलन: VC आवास पर प्रदर्शन में लाठीचार्ज, 10 छात्र घायल!

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पंजाब यूनिवर्सिटी में सीनेट चुनाव को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच आज एक गंभीर टकराव हुआ। छात्र वाइस चांसलर के आवास का घेराव करने की योजना बना रहे थे, लेकिन जब पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस झड़प के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया, जिसके परिणामस्वरूप कई छात्र घायल हो गए। इसके उपरांत भी छात्रों ने अपनी मांगों पर अडिग रहते हुए वाइस चांसलर को मौके पर बुलाने की मांग की। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे संघर्ष को जारी रखेंगे।

जानकारी के अनुसार, सीनेट चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने वाइस चांसलर के आवास का घेराव करने का मन बनाया था। छात्र जब इस दिशा में आगे बढ़ने लगे, तभी अचानक उन्होंने अपना मार्ग बदलकर लॉ ऑडिटोरियम की ओर रुख किया। यहां पंजाब विजन-2047 कार्यक्रम चल रहा था, जिसमें कई मंत्री और व्यापारी शामिल थे। पुलिस ने तत्काल छात्रों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन छात्रों ने पीछे हटने से मना कर दिया। इस पर पुलिस को मजबूरन हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें कुछ छात्रों को चोटें आई। जब घटनास्थल पर डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) पहुंचे, तो उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि वह उनकी वाइस चांसलर से मुलाकात करवा देंगे, लेकिन छात्र उसी स्थान पर बैठक करने की जिद पर अड़े रहे।

छात्र अश्मित सिंह ने कहा कि सीनेट का कार्यकाल चार साल का होता है, और पिछला कार्यकाल अक्टूबर में समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद चुनाव की नोटिफिकेशन जारी नहीं की गई है। नियमों के मुताबिक, चुनाव के लिए नोटिफिकेशन जारी होने में 240 दिन लगने चाहिए। इससे स्पष्ट है कि नई सीनेट का चुनाव समय पर नहीं हो सका, जो छात्रों के लिए चिंता का विषय है। अश्मित ने बताया कि आज के प्रदर्शन में लगभग 10 छात्र घायल हुए हैं, जिनमें से कई का खून भी निकला है।

पंजाब यूनिवर्सिटी के सीनेट चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी आपसी सहयोग दिखाया है। कांग्रेस और बीजेपी के वरिष्ठ नेता धरना स्थल पर छात्रों के समर्थन में उपस्थित हुए। चंडीगढ़ के सांसद ने उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मुलाकात कर जल्द चुनाव कराने की मांग की है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी 12 नवंबर को उप-राष्ट्रपति को पत्र भेजकर चुनाव करवाने का अनुरोध किया है।

सीनेट, जो पंजाब यूनिवर्सिटी की सबसे उच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, में शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्रों और नामांकित सदस्यों का प्रतिनिधित्व होता है। ये सभी मिलकर विश्वविद्यालय की शैक्षिक, वित्तीय और प्रशासनिक नीतियों पर निर्णय लेते हैं। परंतु, इस बार चुनावों के लिए नोटिफिकेशन जारी न होने के कारण छात्रों में व्यापक असंतोष है, और वे इसे लेकर संघर्षरत हैं। राजनीतिक दलों की गतिविधियों के बीच यह देखना रोचक होगा कि क्या छात्रों की मांगें पूरी होंगी या फिर संघर्ष और तेज होगा।